भाभी की चुदाई के रंग में भंग

अब जब मेरी भाभी मान चुकी थी, तो मेरा प्लान अब हड्द से बाहर जाने लगा था. मैं बातरूम का गाते खोला, और इधर-उधर देखने लगा की कोई बाहर था ये नही. फिर बाहर निकल गया.

अब मुझे शाम का इंतेज़ार था, की कब भाभी मेरे कमरे में आएगी, और मैं उनकी छूट में अपना लंड डाल के उनको अपना बना कर उनके साथ सौंगा. कहानी अब आयेज –

इंतेज़ार करना भी मुश्किल होता है जब आपको वो चीज़ मिलने वाली होती है, जिसका आप बेसब्री से इंतेज़ार कर रहे होते है. तब आपके अंदर कुछ फीलिंग्स जागती है. जैसे बहुत ज़्यादा उत्तेजना, उत्साह, गुदगुदी, खुशी, घबराहट, बहुत सी चीज़ें और मेरे साथ भी वही होने लगा था.

मैं इतना एग्ज़ाइटेड हो चुका था की मुझसे शाम का इंतेज़ार तक नही हो रहा था. मेरा लंड हर घंटे कड़क होते ही जेया रहा था भाभी के बारे में सोचते. मेरा हल्का-हल्का सा प्रेकुं भी निकल रहा था.

शाम के 5:45 पीयेम पर भाभी मुझे किचन में दिखी. मेरी और उनकी नज़रें एक-दूसरे से हॅट नही रही थी. उनको लग रहा था मैं कुछ करने आया था वापस, लेकिन क्या करता, कंट्रोल भी तो नही हो रहा था. क्यूंकी मेरी भाभी मुझे तपा जो रही थी. मैने भी मॅन में कहा जितना तू तडपाएगी उतना ही तेरी चीखें निकालूँगा मेरी जान.

मैने जैसे-तैसे नज़रें चुराई, और पानी लेकर निकल गया. उन्होने मेरे जाने के बाद साँस ली, जो उन्होने रोक रखी थी. भाभी शाम के खाने में लग गयी. वैसे शाम को खाना बनाने का काम मेरी छ्होटी भाभी का है. लेकिन उनके पीरियड्स आ चुके थे, इसीलिए वो किचन में नही जेया सकती थी. वो अपने कमरे में आराम कर रही थी [छ्होटी भाभी की कहानी बाद में लौंगा].

मैं अपने काम से मार्केट चला गया अपना वक़्त निकालने के लिए, और ताकि मेरा ध्यान भाभी से कुछ देर के लिए हॅट जाए. मैं एक मेडिकल स्टोर पे गया. मैने शॉपकीपर से फुल डॉटेड कॉंडम माँगा. मैं सोच रहा था पहले भाभी के साथ कॉंडम से किया जाए या मैं रख लेता हू, कहीं भाभी ने माना कर दिया की बिना कॉंडम के नही करना. इसीलिए मेडिकल से मानफ़ोर्से का मोस्ट डॉटेड वाला कॉंडम का 80 वाला पॅकेट ले लिया, जिसमे 10 पीसस निकलते है.

ऑनलाइन देखा था अछा होता है हार्ड सेक्स के लिए. डॉटेड माँगने पर शॉपकीपर ने ऐसे देखा जैसे उसकी बेटी को छोड़ने के लिए लिया था, और घूर्ने लगा. वो लेकर मैं घर की और निकल गया. घर आ कर मैने देखा डोर पर किसी के सॅंडल्ज़ पड़े था. अंदर जेया कर देखा तो मेरी चाची आई हुई थी.

सभी घर वाले चाची से मिलने लगे. भाभी भी अपना काम करके किचन से बाहर आई, और चाची से मिलने लगी. हम दोनो की नज़रें एक-दूसरे से मिली, और मैं उन्हे ऐसे देख रहा था जैसे यहीं हॉल में पटक कर उनकी छूट ना मारने लग जौ.

चाची भी मेरी कुछ काम नही थी. डार्क स्किन और स्लिम देखने में. लंड ऐसे ही खड़ा कर दे उनके बूब्स, जो गोल और एक-दूं टाइट थे. खैर मुझे तो मेरी भाभी की पड़ी थी की बस चाची जाए और मैं और भाभी अपना कार्यक्रम शुरू करे. कुछ देर उन्होने बात की, फिर भाभी ने चाची से कहा-

भाभी: चलो जी, आपको आपके कमरे में छ्चोढ़ देती हू.

चाची ने तुरंत कहा: नही, मैं तेरे साथ तेरे कमरे में रहूंगी.

मेरी तो आत्मा फटत गयी भाई, की चाची तूने ये किया मेरे साथ? इतने दीनो में तो मानी थी ये, और आज जब इसकी छूट को भोंसड़ा बनाने वाला था, तो तू आ गयी.

मैने भाभी को देखा. उन्होने मुझे देखा और हम देखते ही रहे. फिर सोचा अब क्या करे यार, ये चाची ने तो सारा प्लान ही फैल कर दिया. भाभी और चाची उनके कमरे में चले गये, और मैं हॉल में बैठा ही रह गया.

कुछ देर बाद भाभी कमरे से चाची से बोल कर निकली की: मैं आती हू चाची जी, कुछ बर्तन रह गये है हॉल में. उन्हे किचन में रख कर आती हू.

भाभी आई और बर्तन उठाते हुए झुक कर हल्की आवाज़ में कहने लगी: अब क्या करोगे? चाची तो मेरे साथ ही रहेंगी. वो रहेंगी तो में नही आ सकती.

मैने भी अपने मूह के पास टीवी का रिमोट रख कर कहा: आना तो तुझे पड़ेगा. तू अब कुछ भी कर.

भाभी ने फिर कहा: कैसे अवँगी, तुम ही बताओ.

मैने कहा: मुझे नही मालूम. तुम ही कुछ जुगाड़ करना और रात को मेरे कमरे में आ जाना बस. मैं कुछ नही जानता.

और भाभी बर्तन लेकर चली गयी. मैं भी उनके पीछे किचन की और निकल गया, और पीछे से उनको पकड़ के उनके कान के पास मूह लेकर कहा-

मैं: आना तो तुझे पड़ेगा ही. नही तो मैं यहीं तेरे साथ करने लग जौंगा. बोल आएगी ना रत को सुनीता?

भाभी बार-बार मुझे धक्का देने लगी की वो मुझसे छ्छूट जाए. पर छ्छूट ही नही पा रही थी. मैने ज़ोर देते हुए कहा-

मैं: जल्दी बोल, कोई आने वाला है.

उन्होने हड़बड़ी में कहा: हा ठीक है. अब छ्चोढो.

और मैने हाथ ढीले करके उन्हे छ्चोढ़ दिया. अब रात के 9.45 पीयेम हो रहे थे. मैं वेट कर रहा था की, भाभी कब आएगी. कब आएगी. लेकिन वो नही आई. रात के 11:20 पीयेम पर मेरे कमरे के गाते पर एक नॉक हुई. मैं तुरंत उठा और भाग कर गाते खोला.

भाभी एक-दूं से मेरे कमरे में घुस गयी, और गाते खुद लगा दिया. फिर मुझसे चिपक गयी, और मुझे चूमे जेया रही थी जल्दी-जल्दी में. मैने धक्का देकर उन्हे बेड पर फेंक दिया और कहा-

मैं: ये क्या कर रही हो? आराम से करेंगे.

भाभी: आराम से करने का टाइम नही है, जल्दी से करो और मुझे जाना है.

मैं गुस्से में उनके करीब गया और उनके बाल पकड़ के उन्हे उठाया. फिर कहा-

मैं: साली मैने कहा ना मैं तुझे रात भर छोड़ने वाला हू. फिर तू इतनी जल्दी में क्यूँ है? तुझे पता है ना कितना तडपा रही है तू मुझे? सुन ले, तेरी छूट और गांद में अपना लंड घुसा कर ही रहूँगा. और अगर ज़रूरत पड़ी तो मैं तुझे मेरे बाकछे की मा भी बनौँगा.

मैं: लेकिन तू मेरे साथ ही सोएगी उसके बाद भी. तो चुप-छाप मुझे मेरा काम करने दे. नही तो तुझे इतनी ज़ोरो से छोड़ूँगा की तेरी चीखें ना चाहते हुए भी कमरे से बाहर जाएँगी, और तू और मैं दोनो चाहे पकड़े जाए, लेकिन तू रहेगी मेरे कमरे ही.

भाभी: मेरे बाल छ्चोढ़ दे, मुझे दर्द हो रहा है. और मुझसे ऐसे बात मत कर.

मैं: चुप कर, और तू सुन. बोल लेगी ना मेरा लंड अभी तेरी छूट में और गांद में?

भाभी: नही.

मैं: साली नखरे मत कर. वरना जो कहा है वो करके भी दिखा दूँगा अभी.

भाभी: मुझे जाने दे. छ्चोढ़ मेरे बाल. प्लीज़ जाने दे, अगर चाची ने मुझे कमरे में नही देखा तो वो उठ कर घर में मुझे देखने लग जाएँगी.

मैं: आ जाने दे, लेकिन तू बोल मेरे साथ सोएगी या नही?

भाभी: मैने कह तो दिया की में सो जौंगी तेरे साथ. तू चाहे तो मैं पूरी रात तेरे साथ सौंगी. लेकिन प्लीज़ मुझे अभी जाने दे.

मैं: सोना तो तुझे पड़ेगा ही, वरना जितना तू मुझे तडपा रही है, उससे ज़्यादा मैं तुझे तड़पौँगा और तेरी छूट के टुकड़े-टुकड़े कर दूँगा. अपने लंड से फाड़ डालूँगा तेरी इस छूट को. साली मुझे तडपा रही है. तू चल निकाल तेरी चड्डी, आज ही तेरी छूट का भोसड़ा बनौँगा, निकाल अभी.

भाभी मुझे जाने देने के लिए बोल रही थी.

मैं: मैं तुझे एक ही शर्त पर छ्चोढ़ सकता हू. बोल अगर तू मेरी बात मानेगी?

भाभी: कों सी बात?

मैं: तुझे मुझसे चुड कर मेरे लंड का पानी तेरे अंदर लेना पड़ेगा, जब तक तू मेरे बच्चे की गर्भवती नही हो जाती है, और तब तक मेरे लंड पर उछालना होगा.

भाभी: नही, मैं तेरे बच्चे की मा क्यूँ बनू? मेरा पति है, मैं उसके बच्चे की ही मा बनूँगी. किसी और के बच्चे को मैं क्यूँ जानम डू?

मैं: मेरे भाई को अगर करना होता एक और बच्चा तेरे साथ, तो अब तक कर लेता. इसलिए मैं चाहता हू की तू मेरे साथ सो कर मेरे बच्चे को अपने पेट में लेकर जानम दे, और बीच-बीच में तू मेरे भाई से चुड लेना. लेकिन उसके लंड का पानी तेरी छूट में गिरा लेना ताकि उसको लगे ही उसका ही बच्चा है. बोल ऐसा तो कर लेगी?

भाभी: नही मैं नही करूँगी. मैं भाभी हू तेरी, कोई रंडी नही जो हर किसी का लंड अपने छूट में लेकर, उसका पानी मेरे अंदर लेकर, उसके बच्चे की मा बनती राहु.

में: रंडी नही है तो बन जेया. सिर्फ़ मेरी ही रंडी बन कर रह, और मेरे साथ चुड रोज़. मैं तुझे अपनी रंडी बना कर रखूँगा, और तेरी छूट में रोज़ मेरा लंड का पानी निकालता रहूँगा. तेरी छूट भी सूखी नही रहेगी, और तुझे मेरा लंड, और मुझे तेरी छूट मिलती रहेगी.

भाभी: चुप हो जेया, तेरे मूह से बार-बार ये छूट सुन के मुझे पता नही क्या हो जाता है. पता नही मेरी छूट में क्या है ऐसा जो तू मेरी छूट का दीवाना बना घूम रहा है. और मुझे अपने साथ सुलने के लिए मररा जेया रहा है. आख़िर तू चाहता क्या है मुझे बता दे आज? छूट के चक्कर में तुझे तू पागल सी बातें कर रहा है.

आयेज की कहानी अगले पार्ट में.

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