देवर ने लिया भाभी की चूत का स्वाद

भाभी सेक्स स्टोरी अब आयेज-

भाभी ने मुझे देखा और कुछ नही कहा.

मैने कहा: अब शरमाना मत, बोलो चूसोगी ना मेरा लंड?लॉगी ना अपने मूह में?

उन्होने “हा” में सिर हिलाया और कहा: ठीक है ले लूँगी.

और मैं एक बार ज़ोरों से उनके होंठ चूस के उनके बूब्स दबाया. फिर उनके कमरे से जाने लगा, और कहा-

मैं: शाम को मिलते है मेरी जान.

उनके हा करने के बाद अब बस इंतेज़ार था तो उनके मेरे सोने का. और मैं अब इंतेज़ार नही कर सकता था उनकी छूट और गांद को अपना बनाने के लिए. अब आयेज-

भाभी के “हा” करने के बाद मेरे अंदर खुशी के लहरें दौधने लगी थी. मैं यही सोच रहा था की अब बस भाभी मेरे कमरे में आ जाए तो उनकी खैर नही है. जितना उन्होने मुझे अपनी छूट और गांद के लिए तडपया था, उतना ही बदला मैं उनकी छूट और गांद को फाड़ कर लेना चाहता था.

मेरा लंड उनके बारे में सोच-सोच कर अब पहले से ज़्यादा उचकने लगा था, की कब भाभी मेरे पास आए और कब उनकी गांद और छूट खोल मेरा लंड शांत करे. दोपहर का टाइम था. भाभी बातरूम में सभी के कपड़े धो रही थी, और गाते ज़रा सा लगा हुआ था.

मैं उन्हे छ्छूने का प्लान बनाया, की चलो अब जब भाभी मान ही गयी थी, तो क्यूँ ना अब उनके साथ खेला जाए. फिर मैं गया उनके पास. मैं बातरूम में गया और ज़रा गाते को धक्का दिया. गाते खुल गया, और मैं धीरे से अंदर घुस गया. मेरी आहत से भाभी पीछे मूडी, और देखने लगी. मैं उनके पीछे आ कर खड़ा हो गया था, और उन्हे घूर रहा था.

भाभी: तू यहाँ क्यूँ आया? कोई देख लेगा. मैं कपड़े धो रही हू. मम्मी आ गयी तो वो चिल्ला-चिल्ला कर सारे घर को बता देंगी के तू मेरे साथ बातरूम में था. जब की मैं कपड़े धो रही हू.

मैं: चिंता मत करो. मैं अंदर से गाते लगा दूँगा, और अगर आई तो मैं कह दूँगा की अपने कपड़े देने आया था भाभी को.

भाभी: नही तू जेया यहाँ से. तुझे शाम का कहा ना, हमारी बात हुई थी ना?

मैं: तू फिर से वही काम करके मेरा मूड मत खराब कर. जब अपनी बात हो गयी थी, की मैं कुछ भी करू करने देना. तू फिर मुझे माना कर रही है. लगता है तेरा मॅन बदल गया है

भाभी: ये कैसे बात कर रहा है तू? मैं तेरी भाभी हू.

मैं: चल रहने दे! अब जब हम दोनो ने किचन में सब बात कर ली थी, तो अब क्यूँ मूड खराब कर रही है?

भाभी: तूने मुझे मेरी जान क्यूँ कहा? मैं भाभी हू तेरी. अब मत कहना मुझे. मुझे अछा नही लगता.

मैं: तो क्या काहु, और कुछ कहूँगा तो तुझे फिर बुरा लगेगा. बोल क्या बोलू तुझे?

भाभी: मेरे नाम से बुला ले ना. पर ऐसे शब्द से मुझे मत बुलाना. मैं भाभी हू तेरी कोई, जान नही.

मैं: चल ठीक है, सुनीता ठीक है अब? अब मुझे कुछ करने देगी?

भाभी: क्या करने आया है यहाँ? दिख नही रहा मैं कपड़े ढोने आई हू. उपर से कोई आ गया तो दिक्कत खड़ी हो जाएगी.

मैं: कोई नही आ रहा. और उससे पहले मैं निकल जौंगा. करने दे रही हो या नही?

भाभी: हे भगवान! क्या करू इसका मैं अब?

मैं: कुछ तोड़ा सा कर लेने दो, और मैं चला जौंगा.

भाभी: ठीक है कर ले, लेकिन तोड़ा सा ही.

भाभी ने अपने होंठ आयेज कर दिए, और थोड़ी सी सारी नीचे कर दी. ताकि मैं उनके होंठ चूम पौ, और उनके दूध दबा पौ. तो मैने माना कर दिया की मुझे कुछ और देखना है.

तो भाभी ने कहा: क्या देखना है?

मैने कहा: मुझे आपकी सारी उठा के नीचे का देखना है.

भाभी ने माना कर दिया: वो यहाँ नही. कोई आ जाएगा, बात मान. मैं शाम को कमरे में आ जौंगी. फिर देख लेना.

लेकिन मैं नही मानने वाला था, और कहा: जब वहाँ दिखा डोगी तो यहाँ क्या दिक्कत है?

उन्होने बहुत सोचा और ठीक है कह दिया. फिर वो उनकी सारी उठाने लगी, जो कपड़े ढोने के कारण थोड़ी सी गीली हो गयी थी नीचे से. वो उपर तक उनकी सारी ले आई. उन्होने गुलाबी कलर की चड्डी पहनी थी. मैं पहले नीचे बैठा और उनकी चड्डी के पास अपने हाथ लेकर गया. फिर उनकी चड्डी के पास मैं अपना मूह लेकर गया, ताकि उनकी छूट की खुश्बू ले साकु.

मैं जैसे ही उनकी चड्डी के पास यानी उनकी छूट के पास आया, मुझे इतनी अची खुश्बू आई, और मैने अपना मूह वहीं रख दिया. फिर तोड़ा हटा कर भाभी की तरफ देखा, तो उनकी आँखें बंद हो गयी थी. मैने तुरंत उनकी चड्डी पर मूह रखा, और हल्की सी जीभ निकाल कर छूट के हिस्से के पास चाटने लगा.

मेरे मूह से थूक की वजह से उनकी चड्डी गीली होती जेया रही थी, और उनका भी पानी छ्छूटने लगा था. छूट में से आवाज़ आ रही थी मुझे, जैसे पानी दबाने पर आवाज़ आती है वैसे. मुझे उनकी छूट पर हल्का सा हाथ रकने पर उनकी छूट की दीवारों में से पानी आ रहा था. उसमे से मुझे आवाज़ आ रही थी.

मैने उनकी चड्डी नीचे करी, और देखा की उनकी छूट पर बहुत ही घने बाल थे. मुझे छूट के बाल बहुत पसंद है. छूट के बाल देखने का अलग ही मा है, जब आप पुर मूड में हो चुदाई के.

मैं अपनी जीभ उनकी छूट के पास लेकर गया, और तोड़ा सा उनकी छूट से निकलता हुआ पानी पीने की कोशिश करने लगा. मेरा मूह जैसे ही उनकी छूट पर लगा, उनके हाथ से सारी छ्छूट गयी, और मेरे उपर गिर गयी. फिर उन्होने कहा-

भाभी: क्या कर रहा है? यहाँ मत कर. मुझे क्या-क्या हो रहा है अंदर.

मैने कहा: बस तोड़ा सा आपकी छूट का रस्स पीना चाह रहा था की कैसा है आपकी छूट का रस्स. तोड़ा सा पी लेने दो बस.

और मैने वापस उनकी सारी पकड़ा दी और कहा: ये तो निकाल दो या उपर कर लो.

उन्होने उपर कर ली, और मैं फिर से उनकी छूट के पास गया, और जीभ निकाल कर उनकी छूट में चूबो रहा था. मेरी जीभ पर उनकी छूट का पानी लगते ही उसका जो स्वाद आया था, मज़ा ही आ गया था. दिमाग़ में उनकी छूट ही घूम रही थी. एक बार और छूट पर जीभ फेरने पर भाभी ने मेरे सर पर एक हाथ रख दिया.

मैं समझ गया की उनको अब मज़ा आ रहा था मेरी जीभ से. मैने उनकी छूट पर 3-4 बार अपनी जीभ घुमाई, और उनकी छूट से तोड़ा पानी मैं अपनी जीभ पर ले आया. फिर मैं उठने लगा, और भाभी के होंठो में अपनी जीभ डाल कर घुसा दी, और वो पानी मैने भाभी के मूह में जीभ से डाल दिया.

भाभी एक-दूं से सहम गयी, और थूकने लगी, और कहने लगी: ये क्या किया? मूह में क्यूँ लेकर आए वहाँ का पानी? पागल हो क्या? कों करता है ऐसे?

मैं: भाभी ऐसा अछा रहता है. क्या भैया ने तुम्हे वहाँ नीचे जीभ नही फेरी क्या? या कभी उन्होने आपकी छूट में अपनी जीभ से चूसा नही क्या?

अब मैं सीधे-सीधे उनसे बात करने लग गया छूट और गांद और चाटने की, की बहुत हो गया इशारे में बात.

भाभी: नही, तेरे भैया ने कभी नीचे ऐसे कभी नही किया. तूने ही पहली बार किया है मेरे साथ, और जब तूने अपनी जीभ नीचे लगाई, तो मुझे एक-दूं से गुदगुदी हुई, और मेरा हाथ छ्छूट गया.

मैं नीचे हाथ रख के बोला: भाभी इसको छूट कहते है, और पीछे को गांद. और मेरे वाले को लंड कहते है, तो सीधा नाम ही लेलो अब.

मैने भाभी से कहा: अब क्या कहोगी इनको?

भाभी कहने मैं हिचकिचाई और कहा: ठीक है, वही जो तूने कहा है.

मैने कहा: ऐसे नही, पहले नाम लो.

भाभी ने कहा: हा, छूट में कभी नही किया. और बस छूट में अपना लंड डाल के अंदर-बाहर करते थे, और अपना पानी निकाल देते थे, जब ही बच्चे हुए.

मैं: चलो इतना तो पता है आपको की छूट में पानी निकालने से बच्चे होते है (और हल्की सी स्माइल करी).

फिर मैने कहा: देखो छूट को जब तक मज़ा नही आता. जब तक उसमे मर्द की जीभ नही घुसती. या जब तक छूट को मर्द चाट-ता नही. जब तक औरत की छूट बंद होती है. उसे जीभ से चाटने पर ही औरत की छूट थोड़ी खुलती है, ताकि उसमे आसानी से लंड घुस जाए.

भाभी: हा पता है मुझे. अब जेया, लेकिन तूने जो करना था कर लिया ना? अब जेया यहाँ से.

मैं: ठीक है, अभी जेया रहा हू. लेकिन शाम को मेरे साथ सोना है, और उसमे मैं आपकी चूत और गांद में अपना लंड डाल कर सौंगा. तैयार रहना.

भाभी: हा ठीक है, अब निकल यहाँ से.

मैं बातरूम का गाते खोला और इधर-उधर देखने लगा की कोई बाहर था ये नही. फिर बाहर निकल गया.

अब मुझे शाम का इंतेज़ार था, की कब भाभी मेरे कमरे में आएगी, और मैं उनकी छूट में अपना लंड डाल के उनको अपना बना कर उनके साथ सौंगा.

बाकी की कहानी अगले पार्ट में.

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