चूत चुडवा कर घर बचाया

तो फ्रेंड इस पार्ट में जाँएंगे जीजा जी के साथ चुदाई के बाद आयेज क्या हुआ.

कुमार: आज मुझे पहली बार इतना मज़ा आया है चुदाई में. अंजलि तुम बहुत मस्त लड़की हो.

मैं: थॅंक्स मी डियर जीजा जी.

और तभी बाहर से नॉक-नॉक हुआ.

कुमार: राकेश इसमे सारी ग़लती तुम्हारी है. तुमने अपनी बीवी को कभी समय नही दिया. सारा दिन तुम काम में बिज़ी रहे. इस चक्कर में ये सब अंजलि से हुआ है. और जो भी अंजलि से हुआ है, वो सब मजबूरी में हुआ है. उसे तुम्हारी बड़ी मा ने मजबूर किया था.

कुमार: आख़िर तुम्हारे घर की इज़्ज़त की बात थी, इसलिए अंजलि ने ये सब किया. अब जो हो गया सो हो गया. अगर फिर भी तुम डाइवोर्स देना चाहते हो, तो उसका ये मतलब होगा की अंजलि ने तुम्हारे घर की इज़्ज़त बचाई उसकी सज़ा मिली है.

राकेश: ठीक है जीजा जी, अगर आप कहते है तो मैं मान लेता हू की अंजलि ने मेरे घर की इज़्ज़त बचाने के लिए ये सब कुछ किया. लेकिन मुझे तोड़ा समय चाहिए इस बात से बाहर आने के लिए.

कुमार: ठीक है, कोई बात नही. लेकिन तब तक अंजलि तुम्हारे साथ ही रहेगी, ठीक है ना?

राकेश: हा, साथ ही रहेगी, और कहाँ जाएगी?

और फिर सारे घर वालो ने मुझे माफ़ कर दिया, तो जो हुआ मजबूरी में हुआ.

नेक्स्ट रात 9:00 पीयेम सब डिन्नर के लिए डिन्नर टेबल पर बैठे थे. तभी गेस्ट यानी के मेहमान आए, और वो और कोई नही जीजा जी की वाइफ थी. और वो इत्तेफ़ाक़ से मेरी बचपन की सहेली निकली. हम दोनो ने साथ में बैठ कर बहुत सारी बातें की, और फिर बातों-बातों में मैने सारा कुछ बताया (डिन्नर करते टाइम).

दिव्या: अर्रे बस इतनी सी बात? ये तो मैं ठीक कर सकती हू.

मैं: अछा, वो कैसे?

दिव्या: जैसे तू बड़ी चुड़क्कड़ है ना, वैसे मैं भी कुछ कम नही हू.

मैं: तेरा कहने का क्या मतलब है? मैं समझी नही.

दिव्या: अर्रे पागल, जैसे तेरा चक्कर है ना सन्नी के साथ. वैसे मेरा चक्कर भी तेरे पति के साथ है.

मैं: ओह हो, बाप रे! तू तो बड़ी चालाक निकली कुट्टी.

दिव्या: हा, चल ठीक है रात देर से मैं जाती हू तेरे पति के पास, ठीक है?

मैं: सब के सामने कह तो दिया है. लेकिन अब भी वो गुस्से में है. थॅंक्स यार मेरी हेल्प करने के लिए.

दिया: दोस्ती यारी में नो सॉरी नो थॅंक्स, ओके?

करीब रात के 01:00 आम के टाइम मैने दिव्या को राकेश के साथ टेरेस पेर जाते हुए देखा. अब मुझे यकीन हो गया था दिव्या अपना काम कर देगी. टेरेस के उपर.

दिव्या: मेरा जानू क्यूँ उदास है? मुझे बताओ.

राकेश: कुछ नही, बस ऐसे ही.

दिव्या: सब ठीक तो है ना?

राकेश: कुछ नही, बस मैं अंजलि से बात करना चाहता था.

दिव्या: सॉरी जानू, वो अभी सो गयी है. वैसे तुम क्या कहना चाहते थे?

राकेश: बस ये की जो उसने किया वो सही नही है. लेकिन फिर भी मैं उसको मौका दे रहा हू.

दिव्या: तुमको थोड़ी सी भी शरम नही है? अंजलि ने जो भी किया, वो तुम्हारी इज़्ज़त बचाने के लिए किया.

राकेश: लेकिन उसने अनु से चुदाई की वो?

दिव्या: अछा तो तुम कों से माहतमा संत हो. भूल गये तुमने रिया, संगीता भाभी, और मुझे कैसे फ़ससा कर छोड़ा था? याद कर कमीने, कुत्ते? और तू अंजलि को बोलता है वो ये सब करती है.

राकेश: हा-हा कमीनी, मुझे याद है सब जो मैने किया है. और तूने मुझे ये सब बोल कर मेरा लंड खड़ा कर दिया है. देख साली अब मैं तुझे कैसे छोड़ता हू.

दिव्या: ओह तेरा खड़ा हो गया है. वैसे पहले से काफ़ी मोटा लग रहा है.

और दिव्या राकेश के लंड को सहलाने लगी पंत के उपर से, और फिर ज़िप खोल कर लंड बाहर निकाला और अपने मूह में लेकर चूसने लगी.

राकेश: हमेशा से तेरे जैसे बीवी चाहता था. सेक्सी, हॉट, जो अपने आप ही मेरा लंड हाथ में पकड़ कर बोले “छोड़ो ना”.

दिव्या: बोल तो रही हू छोड़ो मुझे. मैं तड़प रही हू तेरे लंड के लिए.

राकेश: तो चलो उतरो अपने कपड़े, और हो जाओ नंगी. फिर देखो कैसे मैं करता हू तेरी चुदाई.

दिव्या: मैं क्यूँ उतारू कपड़े? तू ही उतार मेरे कपड़े, और कर मेरी चुदाई.

और फिर राकेश ने दिव्या के कपड़े उतार दिए, और अपने भी कपड़े उतार दिए. अब दोनो नंगे हो गये. फिर राकेश ने दिव्या को टेरेस की दीवार की तरफ झुका दिया, और खुद दिव्या के पीछे आ गया. वो उसकी गांद पर हाथ मारने लगा, और फिर अपना लंड अपने हाथ से पकड़ कर दिव्या की छूट पर सेट किया.

राकेश: अब मेरा लंड तेरी छूट में जाने वाला है.

दिव्या: डाल दो ना अपना लंड, और मेरी छूट छोड़ो राजा. मुझे छोड़ो राजा, जी भर के छोड़ो. ह ह ह आह, मुझे बहुत मज़ा आ रहा है. हा ऐसे ही छोड़ते रहो जानू ह ह.

राकेश: मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है आह. मेरा निकालने वाला है दिव्या ह ह. ओह शीत, मेरा निकल गया. बहुत मज़ा आया तेरी छूट छोड़ने में. आज नींद बहुत मस्त आएगी. बाइ दिव्या, कल सुबा मिलते है.

फिर राकेश नीचे आ गया, और दिव्या अपने रूम में चली गयी. करीब रात के 3:00 बजे के आस-पास राकेश मेरे पास आए, और मुझे अपने गले लगा कर कहा-

राकेश: मुझे बहुत खुशी है की हम अपनी शादी को एक और मौका दे रहे है.

मैं: तुम्हारे मूह से ये बात सुन कर मुझे अजीब लग रहा है.

राकेश: ऐसी बात करके मुझे अब और शर्मिंदा ना करो. प्लीज़ सब भूल जाओ, और मुझे माफ़ कर दो.

मैं: चलो जो हुआ उसे जाने दो. अब नॉर्मल हो जाओ. चलो अब सो जाते है. रात बहुत हो चुकी है.

राकेश: नही, रात अभी बाकी है. और मुझे तुमसे अभी प्यार करना है.

मैं: नही डार्लिंग, ये तुम्हारी मौसी का घर है. यहाँ ये सब करना ठीक नही होगा डार्लिंग.

लेकिन मेरे पति नही माने. वो मेरे पीछे आ गये, और खड़े हो कर मुझे किस्सिंग करने लगे. वैसे करना तो मुझे भी था, लेकिन मैं अपने पति के सामने शरमाने का नाटक कर रही थी.

राकेश: डार्लिंग मुझसे अब और सबर नही हो रही है.

सबर तो मुझसे भी नही हो रहा था. लेकिन मैं नाटक कर रही थी. फिर मेरे पति ने मेरी निघट्य उतार दी, और मैं बूब्स को अपने हाथो से दबाने लगी. वो मेरे निपल अपने मूह में लेकर चूसने लगे. मेरे मूह से आ अया आह आह निकालने लगी.

मैं: डार्लिंग आज तुम बहुत जोश में लग रहे हो.

राकेश: हा डार्लिंग, बहुत दिन हो गये है, तुम्हारे साथ सेक्स नही किया है. डार्लिंग तुम्हारा जिस्म बहुत मस्त है. जब मैं तुम्हे नंगी देखता हू, खुद पर कंट्रोल नही कर पाता हू.

और फिर मेरे पति भी नंगे हो गये, और अपना लंड मेरे मूह की और किया. मैं लंड अपने मूह मैं लेकर चूसने लगी. उनका लंड बहुत टाइट और गरम था.

मैं: डार्लिंग मैने आज से पहले कभी तुम्हारा लंड इतना टाइट नही देखा.

राकेश: ये तुम्हारे डोर रहने का असर है. ये तुम्हारे लिए तड़प-तड़प कर टाइट हो गया है. और डार्लिंग तुम धीरे-धीरे मेरे लंड को चूसो. सुबह होने में अभी बहुत टाइम पड़ा है.

मैं: हा लेकिन तुम्हारा लंड इतना टाइट देख कर मुझसे रहा नही जेया रहा है.

राकेश: डार्लिंग इतनी जल्द-बाज़ी मत करो. अभी हमे हम दोनो के जिस्म का मज़ा लेना है.

और फिर मेरे पति नीचे सीधे लेट गये, और मैं उनके मूह पर चढ़ गयी. अब वो अपनी जीभ से मेरी छूट को चाटने लगे. ह ह ओह क्या मज़ा आ रहा था छूट चटवाने में.

मुझे नही पता था की मेरे पति ऐसे भी कर सकते थे, क्यूंकी इससे पहले हमने 4 से 7 बार ही सेक्स किया था. ऐसा सेक्स आज पहली बार कर रहे थे, तो बहुत मज़ा आ रहा था. मेरी छूट अब बहुत गीली हो चुकी थी, और अपना पानी छ्चोढ़ रही थी. फिर मेरे पति ने अपनी बीच वाली उंगली डाली, और अंदर-बाहर करने लगे.

मैं: डार्लिंग तुम्हारी उंगली में तो बहुत जादू है, मुझे बहुत मज़ा आ रहा है.

राकेश: डार्लिंग तुम्हारी छूट तो बहुत मस्त है, और इतनी गीली हो गयी है. देखो कितनी आराम से मेरी उंगली तुम्हारी छूट में अंदर-बाहर हो रही है.

मैं: डार्लिंग मैं यकीन नही कर सकती तुम इस तरह से भी कर सकते हो. हमारी शादी को 7 महीने होने को आए है. तुमने कभी इस तरह से नही किया है. आज तुम पहली बार इस तरह कर रहे हो.

राकेश: डार्लिंग इसकी एक ही वजह है. हम दोनो ने कभी एक-दूसरे को समझा नही, इसलिए.

मैं: हा, लेकिन अब इन बातों को छ्चोढो और मज़े लो बस.

और फिर मेरे पति ने मुझे डॉगी बना दिया, और वो मेरे पीछे घुटनो के बाल आ गये. फिर अपना लंड मेरी छूट पेर सेट किया, और गपा-गॅप गपा-गॅप मुझे छोड़ने लगे. मैं आ आ की आवाज़ निकालने लगी. फिर मेरे पति ने मेरी छूट के अंदर ही अपने लंड की पिचकारी छ्चोढ़ दी. जब लंड बाहर निकाला, तो मेरी छूट से उनके लंड का पानी बाहर बह रहा था तपाक-तपाक.

फिर हम दोनो ने एक-दूसरे को गले लगाया, अपने-अपने कपड़े पहने, और साथ सो गये.

हेलो फ्रेंड्स, आप सब को ही मेरी सेक्स कहानी पसंद आए तो प्लीज़ मेरी कहानी पर कॉमेंट कीजिएगा.

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