रिश्तों के बीच बिस्तर गरम करने की तैयारी

सेक्स स्टोरी अब आयेज-

दूसरे दिन सुबह हुई तो मेरे बदन में अभी भी रात की मदहोशी की हल्की गूँज थी. पर आज मेरे अंदर एक अलग ही जोश और कॉन्फिडेन्स था. मैने अपने बाग से अपनी गहरे लाल रंग की डिज़ाइनर सारी निकली. इस सारी में मेरा भरा-भरा बदन और भी कासिला लगता था, और मेरी 34-28-38 का फिगर और 5’4″ की हाइट इसमे और भी कमाल दिखती थी.

मैने आईने के सामने खड़े होकर खुद को तैयार किया. जब मैं पूरी तरह से तैयार हो गयी, तो आईने में अपनी इमेज देख कर मैं खुद हैरान रह गयी. लाल सारी में मैं सच में एक अप्सरा लग रही थी, या शायद एक रंडी. जो भी हो, पर हर मर्द को पागल करने के लिए काफ़ी थी.

मेरी च्चती के उभार और पतली कमर इस सारी में और भी हॉट लग रहे थे. मैं जान-बूझ कर पल्लू को तोड़ा नीचे रखा था, ताकि मेरे गोरे और भरे हुए बूब्स की हल्की झलक दिखे. मेरी कमर पर पल्लू ऐसा कस्स के बँधा था की हर कर्व सॉफ दिख रहा था.

जब मैं नाश्ते के लिए बाहर आई, तो सब की नज़रें मुझ पर टिकी रह गयी. परेश जी की आँखें तो जैसे मुझ पर ही जाम कर रह गयी. उनकी साँसे तेज़ हो गयी और वो अपनी जगह पर थोड़े बेचैन हो गये. उनका चेहरा लाल हो गया. वो बार-बार मुझे देख रहे थे, जैसे उनके मॅन में कोई हज़ार ख़याल चल रहे हो.

अरुण जो मेरे बगल में बैठा था, उसकी तो हालत और भी खराब थी. वो मेरी तरफ देखने की हिम्मत भी नही कर पा रहा था, पर उसकी आँखें चोरी-चोरी मेरे बूब्स और गांद पर जेया कर ठहर जाती थी. उसके माथे पर पसीना सॉफ दिख रहा था. उसका लंड उसकी पंत में हल्का सा उभर चुका था, ये मैं सॉफ महसूस कर सकती थी.

मुझे उन दोनो को इस तरह पागल होते देख कर अंदर ही अंदर बहुत मज़ा आ रहा था. मेरी इस हॉट लुक का असर उन दोनो पर पूरी तरह हो चुका था. दोपहर तक सब काम निपटने के बाद, मैं किंजल भाभी के पास गयी.

मैं (धीरे से किंजल भाभी को, ताकि कोई और ना सुने): किंजल भाभी, चलो कुछ काम है. मार्केट में जाते है.

किंजल भाभी (हैरानी से): दीदी, क्या काम है?

मैं (उसे धीरे से आँख मारते हुए): अर्रे, घर पर परेश जी से अकेले में मिल नही पाएँगे. शायद बाहर मौका मिल जाए.

किंजल भाभी की आँखों में चमक आ गयी. हा दीदी, बिल्कुल सही कहा. चलो.

हमने घर में सब को बता दिया, की मार्केट में कुछ काम था, और हम दोनो निकल पड़ी. परेश जी वहीं बैठे थे. जब मैं निकल रही थी, तो मैने उन्हे एक तेज़, सेडक्टिव इशारा किया. वो समझ गये. उनकी आँखों में भी एक चमक आ गयी.

जब हम मार्केट के लिए निकले, तो हर तरफ से लोगों की नज़रें मुझ पर ही थी. मेरी रेड सारी और उसमे मेरा कासिला बदन देख कर हर मर्द मुझे छोड़ने के सपने देख रहा था. कुछ लोग तो इतने बेशरम थे की घूर-घूर कर देख रहे थे, और कुछ अपनी बीवियों के साथ होते हुए भी मुझ पर लाइन मार रहे थे. उनकी आँखों में सॉफ हवस और तड़प दिख रही थी. मुझे उन सब मर्दों को इस तरह से अपनी तरफ खींचते देख कर अंदर ही अंदर बहुत खुशी हो रही थी. हम मार्केट में घूम ही रहे थे की तभी अरुण भी हमे जाय्न करने के लिए आ गया.

मैं (परेश जी और किंजल भाभी की तरफ देखते हुए): लो, ये कहाँ से आ गया?

किंजल भाभी (मेरी तरफ देखते हुए, धीरे से): हा दीदी, इसका अब क्या करे?

मैं (उन दोनो की तरफ देखते हुए, कॉन्फिडेंट हो कर): आप दोनो टेन्षन ना लो. मैं इसको संभाल लूँगी.

अरुण तो खुश था की वो हमारे साथ था. मैने उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान देखी. थोड़ी देर बाद जब हम सब एक दुकान के बाहर थे, मैने किंजल भाभी को अपनी तरफ इशारा करके बुलाया. मैने उन्हे कुछ धीरे से कहा, जिसे सिर्फ़ वो ही सुन सकी.

किंजल भाभी ने मेरी आँखों में देखा, उन्होने मेरी बात का मतलब समझ लिया. उन्होने भी धीमे से सर हिलाया. फिर मैं अरुण, परेश जी और किंजल भाभी तीनो की तरफ घूम गयी.

मैं (सब की तरफ देखते हुए): अर्रे हा, मुझे अभी मार्केट में तोड़ा और काम है. किंजल भाभी, अगर आपको घर जाना है तो परेश जी आपको छ्चोढ़ देंगे.

परेश जी की आँखों में हल्की चमक आई, और उनके चेहरे पर एक अजीब सी बेचैनी दिखी, जैसे वो मेरे साथ रुकना चाहते हो. उन्होने किंजल भाभी की तरफ देखा.

मैं (परेश जी की तरफ देखते हुए, थोड़ी मासूमियत से): अर्रे परेश जी, मेरा काम तोड़ा लंबा चलेगा. आप लोग क्यूँ परेशान होंगे? आप किंजल भाभी को घर छ्चोढ़ दीजिए, मैं अरुण के साथ आ जौंगी. हम दोनो देर तक काम निपटा लेंगे.

परेश जी ने किंजल भाभी की तरफ देखा, और किंजल भाभी ने उन्हे हल्का सा इशारा किया. उन्होने मेरी बात मान ली.

परेश जी (मॅन मारते हुए, थोड़ी झुंझलाहट के साथ): ठीक है मामी जी, जैसा आप कहे.

किंजल भाभी और परेश जी ने हल्की मुस्कान के साथ एक-दूसरे की तरफ देखा और हमसे विदा लेकर निकल गये. अरुण भी खुश था की मैं उसके साथ रुक रही थी.

मार्केट में अब हम दोनो ही थे. मैं अरुण के साथ धीरे-धीरे चल रही थी. उसकी तरफ थोड़ी-थोड़ी देर में नॉटी स्माइल देती हुई. उसके चेहरे पर अब बेकरारी सॉफ दिख रही थी. जब हम एक थोड़ी सुनसान गली से गुज़र रहे थे, तो मैने जान-बूझ कर एक दुकान पर रुक कर कुछ देखने का बहाना किया. अरुण भी मेरे पास आ कर खड़ा हो गया.

मैं (धीरे से, उसकी आँखों में देखते हुए): अरुण, आज मार्केट में कितने लोग मुझे घूर रहे थे. तुमने देखा?

अरुण (आँखों में गुस्सा सॉफ दिख रहा था, मुट्ठी भींच गयी थी): हा मौसी, मैं सब देख रहा था. और मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था. मॅन कर रहा था सब को मार डू. कोई आपको ऐसे कैसे देख सकता है? आप मेरी…

उसने अपनी बात बीच में ही रोक दी, जैसे कुछ बोलने से रुक गया हो. उसका पोज़ेसिव गुस्सा अब बाहर आ रहा था.

मैं (उसके करीब आ कर, धीरे से उसकी बाज़ू सहलाते हुए): मेरी क्या, अरुण? तुम्हे इतना गुस्सा क्यूँ आया?

अरुण (मेरी तरफ गुस्से और हवस भारी नज़रों से देखते हुए): मौसी, आपको कोई और देखे तो मुझे पसंद नही आता. आप इतनी खूबसूरत हो, और वो सब, मेरा मॅन कर रहा था सब की आँखें निकल लू.

मैने उसकी आँखों में देखा. उसका गुस्सा और पोज़ेसिव्नेस मुझे और भी अछा लगा. मैं समझ गयी थी की अब वो पूरी तरह मेरे जाल में फ़ासस चुका है.

मैं: अरुण, मुझे अंदर के कुछ कपड़े लेने है. तुम्हारे इस मार्केट में कोई अची शॉप हो तो लेकर चलो ना.

अरुण (चेहरा लाल करते हुए): मैं आपको एक बहुत अची दुकान पर ले चलता हू. वहाँ हर तरह के बड़े आचे कपड़े मिलते है.

अरुण मुझे एक ऐसी दुकान पर ले गया जहाँ सिर्फ़ सेक्सी और फॅन्सी अंडरवेर मिलते थे. अंदर जाते ही मेरी साँसे थम सी गयी. दुकान में हर तरफ लेस, सिल्क, और नेट की बनी ब्रा-पनटी लटकी हुई थी, एक से बढ़ कर एक हॉट डिज़ाइन में. अरुण ने बड़े कॉन्फिडेन्स के साथ कुछ ब्रा-पनटी उठाई और मेरी तरफ बढ़ता हुआ बोला.

अरुण (मेरी तरफ देखते हुए, हल्की मुस्कान के साथ): मौसी, आप पर ये रेड लेस वाली ब्रा और पनटी बहुत अची लगेगी. और ये ब्लॅक ट्रॅन्स्परेंट सेट भी देखो, ये तो आप पर कमाल लगेगा.

मैं (उसे देखते हुए, हल्के से शरमाते हुए और हस्सी दबाते हुए): धात! अरुण, ऐसे मुझे थोड़ी आचे लगेंगे. ऐसा तो तेरी बीवी पूजा को अछा लगता होगा. मेरी अब उमर हो गयी है, मैं टीन बच्चो की मा हू.

अरुण मेरी तरफ और करीब आता है. उसकी नज़रें मेरी भारी हुई च्चती पर घूमती है. फिर मेरी पतली कमर और मटकती गांद पर.

अरुण: मौसी, क्या बात कर रही हो? आप तो बहुत सेक्सी हो. मेरी बीवी, पूजा, तो आपके सामने कुछ भी नही है. आपका फिगर (उसने मेरी कमर पर हल्का सा हाथ फेरने की कोशिश की, पर फिर रोक लिया), आपका बदन और ये आपके बूब्स (उसकी नज़रें मेरे उभरे हुए बूब्स पर टिक गयी, जैसे वो उन्हे घूर रहा हो). मौसी, आप तो लगती ही नही की आप टीन बच्चो की मा हो. आप तो किसी जवान कॉलेज की लड़की से भी ज़्यादा हॉट हो.

उसके मूह से अपनी तारीफ सुन कर, ख़ास कर मेरे बूब्स और गांद को घूरते हुए, मुझे अंदर ही अंदर एक अजीब सी उत्सुकता और गर्मी महसूस हुई. मैने हल्की सी मुस्कान दी.

मैं: तुम ना बहुत नॉटी हो गये हो. अपनी मौसी को कोई ऐसा बोलता है भला?

अरुण: अर्रे अब तो हम फ्रेंड्स है ना. और आप ये लेलो. आप पर सच में बहुत मस्त लगेगा.

मैं (धीरे से, शरमाते हुए): अरुण, ये तो बहुत महँगा होगा. मेरे पास इतने पैसे भी नही है.

अरुण (तुरंत बोलते हुए, एक कॉन्फिडेंट स्माइल के साथ): अर्रे मौसी, पैसे की टेन्षन मत लो. मैं आपको गिफ्ट देता हू. आप बस उसको रख लो.

मैं उसकी इस बात पर और हैरान रह गयी. अरुण मुझे इतने पर्सनल कपड़े गिफ्ट को बोल रहा था. मेरे अंदर एक अजीब सी हलचल हुई.

मैं (उसे देखते हुए, थोड़ी फिकर के साथ): अरुण, ये सब अगर किसी को पता चलेगा तो? घर में या कहीं और..

अरुण (मेरे करीब आ कर, धीमे से): मौसी, आप टेन्षन ना लो. ये बात हम दोनो के बीच रहेगी. कोई तीसरा नही जानेगा. ये मेरा सीक्रेट गिफ्ट है आपके लिए.

उसकी आँखों में विश्वास और हवस दोनो थी. उसने मुझे इतना कॉन्फिडेंट कर दिया की मैं कुछ कह नही पाई. मैने उसकी बात मान ली और उसने मेरे लिए कुछ सेक्सी ब्रा-पनटी पॅक करवा ली. जब हम दुकान के बाहर निकले, तो अरुण का चेहरा अभी भी लाल था.

हम धीरे-धीरे मार्केट से घर की तरफ बढ़ने लगे. रास्ते भर मैं अरुण से इधर-उधर की बातें करती रही, उसकी तरफ कभी-कभी एक नॉटी स्माइल देती हुई. वो भी शर्मा-शर्मा कर मेरी तरफ देख रहा था. उसके दिमाग़ में क्या चल रहा होगा, ये मैं अची तरह समझ सकती थी.

जब हम घर पहुचे, तो शाम हो चुकी थी. अंदर आते ही मैने देखा की घर में सब लोग अपने-अपने काम में लगे हुए थे. परेश जी और किंजल भाभी भी दिख रहे थे, जैसे कुछ हुआ ही ना हो. किंजल भाभी किचन में थी, छाई बना रही थी.

मैं धीरे से किचन की तरफ बढ़ी जहाँ किंजल भाभी अकेली थी. मैने उन पर कोई शक ना हो, इसलिए ऐसे ही कॅषुयल अंदाज़ में उनसे बात करना शुरू किया.

मैं (एक कप उठाते हुए): क्या बना रही हो किंजल भाभी? थकान हो गयी आज तो मार्केट में घूम-घूम कर.

किंजल भाभी (मुस्कुराते हुए, मेरी तरफ देखते हुए): बस दीदी, छाई बना रही थी. आपका काम हो गया?

मैं (धीरे से उनके पास आते हुए, हल्की मुस्कान के साथ): हा, काम तो हो गया. पर तुम बताओ, परेश जी कहाँ लेकर गये थे?

किंजल भाभी ने पहले मेरी तरफ देखा. फिर एक हल्की सी शर्मीली मुस्कान उनके चेहरे पर आ गयी. उनकी आँखों में अब भी रात की मस्ती की चमक सॉफ दिख रही थी.

किंजल भाभी (धीमे से, आजू-बाजू देखते हुए की कोई सुन ना ले): बस दीदी, घर ही चले आए थे.

मैं (उनकी कमर पर हल्का हाथ रखते हुए): बस घर? या घर में कहीं और? बताओ ना, क्या-क्या हुआ?

किंजल भाभी तोड़ा और शर्मा गयी, पर उनकी मुस्कान और गहरी हो गयी. वो समझ गयी थी की मैं क्या पूच रही हू.

किंजल भाभी (मेरी आँखों में देखते हुए, उत्तेजित आवाज़ में): दीदी, घर पर सब थे तो मौका ही नही मिला. परेश जी का बड़ा लंड लिया है, तब से रहा नही जेया रहा. कुछ जुगाड़ करो.

मैं (किंजल भाभी की बात सुन कर, एक हल्की मुस्कान के साथ): कल की तरह, कुछ सोचते है. तुम चिंता मत करो.

शाम ढालने लगी, और सब लोग रात के खाने के लिए इकट्ठे हुए. खाने के बाद, हम सब ड्रॉयिंग रूम में बैठ कर बातें करने लगे. आज भी मैने पूजा की वही रेड सिल्की मॅक्सी पहनी थी, जो मेरे भरे हुए बदन पर कस्स कर बैठ रही थी और मेरे बूब्स और गांद की हर करवट को सॉफ दिखा रही थी. इस मॅक्सी के अंदर मैने अरुण के गिफ्ट की हुई रेड डिज़ाइनर ब्रा और मॅचिंग पनटी पहनी थी, जिससे मेरा कॉन्फिडेन्स और भी बढ़ गया था.

किंजल भाभी ने भी एक पिंक कलर की मॅक्सी पहनी थी, जिसमे वो भी बहुत प्यारी लग रही थी.

हम चारों (मैं, किंजल भाभी, अरुण और परेश जी) बैठे बातें कर ही रहे थे.

परेश जी (मीयर्रा की तरफ देखते हुए): मीयर्रा, मेरा मॅन है आज च्चत पर सो जौ. बाहर ठंडी हवा चल रही होगी.

मीयर्रा (नींद में आँखें मलते हुए): अर्रे सुनिए जी, च्चत पर आपको नींद नही आएगी. वहाँ मच्छर भी बहुत होंगे. और वैसे भी, मुझे बाहर सोने में नींद नही आती. आप अकेले सो जाओ, अगर मॅन है तो.

परेश जी ने किंजल भाभी की तरफ हल्की सी मुस्कान के साथ देखा, और किंजल भाभी ने भी उन्हे आँखों ही आँखों में इशारा कर दिया. उन दोनो की आँखों में एक समझौता सॉफ दिख रहा था. अरुण इस सब से अंजान, सिर्फ़ मेरे बदन को घूर रहा था.

मीयर्रा अपने कमरे की तरफ चली गयी. थोड़ी देर में, किंजल भाभी भी सोने के लिए उठ गयी और अपने कमरे की तरफ बढ़ गयी. परेश जी भी उठे, और च्चत की तरफ चले गये.

अब ड्रॉयिंग रूम में सिर्फ़ मैं और अरुण बचे थे. अरुण ने मेरी तरफ देखा और आँखों ही आँखों में इशारा किया जैसे कह रहा हो, ‘मेरे कमरे में आ जाओ’. मैने भी उसकी तरफ एक नॉटी स्माइल दी और धीरे से अपना सर हिलाया.

मैं (होंठो पर मुस्कान लिए): तुम चलो, मैं थोड़ी देर में आती हू. तोड़ा वेट करना.

अरुण के चेहरे पर खुशी और बेकरारी सॉफ दिख रही थी. वो तुरंत उठा और अपने कमरे की तरफ चल दिया. जैसे ही वो आँखों से ओझल हुआ, मैं धीरे से किंजल भाभी को बुलाने गई. दरवाज़ा हल्का सा खोला और अंदर झाँका.

मैं (धीमी, सिसकारी भारी आवाज़ में): किंजल…
पर मेरी आवाज़ सुनते ही झट से उठ कर मेरे साथ बाहर आई. उनकी आँखों में भी उत्तेजना और बेचैन थी.

किंजल भाभी: दीदी, क्या हुआ? अरुण गया?

मैं (मुस्कुराते हुए, उनके कान में फुसफुसते हुए): हा, वो तो गया. पर अब तुम च्चत पर जाओ. तुम्हारे दामाद जी इंतेज़ार कर रहे होंगे. और हा आज पूरी रात उनको सोने मत देना.

किंजल भाभी शर्मा कर लाल हो गयी, पर उनके चेहरे पर एक नॉटी स्माइल थी.

किंजल भाभी (धीमे से, पर उत्तेजित आवाज़ में): दीदी, आपने तो हम दोनो को ही पागल कर दिया है. अब तो लगता है उनका लंड आज मेरी प्यास बुझा ही देगा.

मैं (उनकी कमर पर थपकी देते हुए): चुप कर, साली. अब जेया, देर मत कर. मैं अरुण को देखती हू. और हा, मज़ा करना.

किंजल भाभी ने जल्दी से एक बार और मुझे गले लगाया और बगल के दरवाज़े से च्चत की तरफ निकल गयी. उनकी चाल में एक अलग ही उत्सुकता थी.

अब मैं अकेली थी ड्रॉयिंग रूम में. मैने एक बार चारों तरफ देखा, सब जगह शांति थी. मैने अपने आप को हल्का सा ठीक किया और अरुण के कमरे की तरफ बढ़ने लगी. मेरे अंदर भी एक अजीब सा जोश और बेचैनी थी.

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