ही गाइस, मेरा नाम जशन है. ये हॉट कहानी मेरी रंडी टीचर की है. कैसे मैने उसे अपने कॉलेज की रंडी बनाया.
ये बात तब की है जब मैं 1स्ट्रीट एअर में था. हमारे कॉलेज में नयी इंग्लीश टीचर आई थी (सिमरन). उसको देख के पूरा कॉलेज पागल सा हो गया था. सब उसकी लेना चाहते थे, और वो मेरी क्लास की इंचारगे बनी. मैं तो खुशी से पागल हो गया.
उसके बारे में बता डू. उसका रंग बिल्कुल गोरा और कमर थोड़ी स्लिम थी. पर उसके चुचे (बूब्स) एक-दूं बड़े-बड़े और गांद (आस) मोटी उभरी हुई थी. उस दिन वो ब्लॅक कलर का टाइट कुर्ता डाल के आई थी. डीप नेक था और जीन्स बिल्कुल फ़ससी हुई थी.
उसकी गांद मस्त लग रही थी. उसमे जैसे मैने उसे पीछे से देखा, उसकी गनाद मटक रही थी. मॅन कर रहा था उसकी गनाद पे ज़ोर से 4-5 थप्पड़ मार डू. अफ क्या लग रही थी.
मैं वापस घर गया, तो मैं बस उसी के बारे में सोचता रहा. उसकी गांद दिमाग़ से निकल ही नही रही थी. फिर मैने डिसाइड किया इसको तो छोड़ के ही रहूँगा. पर समझ नही आ रहा था कैसे. अगले दिन मैं क्लास में बैठा ये सोच ही रहा था की सिमरन ने मुझे बुलाया, और कहा की बाहर वॉटर कूलर से बॉटल में पानी भर लाउ.
पानी भरते-भरते मुझे आइडिया आया क्यूँ ना इसकी बॉटल में वियाग्रा मिला डू. मैने डिसाइड किया नेक्स्ट टाइम जब भी मुझे मौका मिलेगा वॉटर बॉटल भरने का, मैं उसमे वियाग्रा मिला दूँगा. काफ़ी दिन बीट गये, पर उसने वॉटर बॉटल भरने को बोला ही नही. इससे मैं मायूस हो गया.
फिर एक दिन मेद्स टीचर छुट्टी पे था, और उसका लास्ट पीरियड ही होता है. तो उसकी रीप्लेस्मेंट में सिमरन आ गयी.
सिमरन: जशन बेटा बाहर से बॉटल में पानी भर लाओ.
मे (एग्ज़ाइटेड होके): हा माँ अभी लाया.
मैने बाग से वियाग्रा की गोली निकली, और सिमरन से बॉटल लेके मैं नीचे चला गया, और उसमे वियाग्रा मिला के ले आया. सिमरन ने पानी पी लिया. थोड़ी देर बाद वो गरम होना शुरू हो गयी. वो अपनी चेर पे बैठ गयी, और अपने लिप्स चबा रही थी. उससे कंट्रोल नही हो रहा था. वो कभी अपना हाथ बूब्स पे ले जाती, कभी अपनी छूट की तरफ. 5 मिनिट तक ऐसा ही चलता रहा.
मेरा लंड खड़ा हो गया तो मुझे आइडिया आया. मैं अपनी सीट से उठा और उसके पास गया. वो चेर पे बैठी थी. मैने उससे पूछा-
मे: मिस, मे ई गो तो थे टाय्लेट?
सिमरन: नही, क्लास ओवर होने वाली है, तब जाना.
मे: पर माँ मुझसे कंट्रोल नही हो रहा.
सिमरन: थोड़ी देर में कुछ नही होता.
मे: मैं तोड़ा उसके मूह की तरफ घूमा, और पंत में मेरा खड़ा लंड उसकी आँखों के सामने आ गया.
सिमरन (उसने अपने लिप्स बीते किए): जाओ जल्दी.
मे (अपने लंड पे हाथ रखते हुए): थॅंक्स माँ.
जैसे ही मैं क्लास में वापस आया क्लास ओवर की बेल बाज गयी, और सभी बच्चे क्लास से चले गये. अब क्लासरूम में सिर्फ़ मैं और सिमरन थे. वो क्लासरूम से जाने लगी तो मैने उसे रोका और कहा-
मे: माँ मेरे कुछ डाउट्स है.
सिमरन: कल क्लास में पूच लेना.
मे: नही माँ, परसो यूनिट टेस्ट है. आप आज ही मेरे डाउट्स क्लियर करो (मैं ज़िद करने लगा).
सिमरन: ठीक है जल्दी पूछो.
मैं अपने बेंच पे बैठ गया, और वो भी मेरे साथ बैठ गयी. मैने उसका हाथ पकड़ा, और अपने खड़े लंड पे रख दिया. मुझे लगा की वो गुस्सा करेगी, पर वो पंत के उपर से ही मेरा लंड मसल रही थी.
उसकी आँखों में सेक्स की हवस सॉफ दिख रही थी. मैने अपना एक हाथ उसकी छूट पे रखा, और दूसरा उसके लेफ्ट बूब्स पर, और ज़ोर से दबाना शुरू कर दिया. 2 मिनिट बाद मैं उठा, और अपना लंड पंत से निकाला, और उसके मूह के पास ले गया.
वो बोली: डोर लॉक करो पहले, कोई आ जाएगा.
मैं भाग के गया और डोर लॉक कर दिया. फिर सीधा उसके मूह में लंड डाल दिया, और वो लॉलिपोप की तरह मेरे मोटे लॉड को चूस रही थी. मैने देर ना करते हुए उसकी कुरती उतार दी, और ब्रा के उपर से ही उसके मोटे चुचे पकड़ लिए, और उनके साथ खेलने लगा.
मे: मिस आपके इन बड़े चुचो में कितना लीटर दूध है?
सिमरन: खुद ही पता लगा लो.
मैने उसकी ब्रा निकाल दी और सीधा रिघ्त चुचे का निपल अपने मूह में ले लिया, और ज़ोर-ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया. मैने उसके निपल को काट लिया.
सिमरन: आआआहह, आराम से करो. दर्द हो रहा है.
मे: कुटिया अभी तो और बहुत कुछ होना बाकी है. तुझे इतने में ही दर्द हो गया.
सिमरन: तो करो शुरू, किसने रोका है? मेरी छूट में आग लगी पड़ी है. जल्दी से उसको शांत करो.
मैने उसको खड़ा किया, और जल्दी से उसकी सलवार निकाल दी. अब वो सिर्फ़ पनटी में थी. मैने उसके दोनो चुचो में अपना मूह डाल दिया, और उंगलियों से उसके निपल से खेलने लगा.
सिमरन: आ आआहह आअहह जल्दी से अपना हथियार मेरी गुफा में डाल दो. अब बर्दस्त नही हो रहा.
पनटी में हाथ डाल के वो अपनी छूट सेलहा रही थी. मैने उसकी पनटी निकली, और उसके मूह में डाल दी. फिर मैं नीचे बैठा और उसकी छूट पे अपना मूह लगा के उसकी गीली छूट चाटने लगा. उसने अपनी थाइस से मेरा मूह दबा दिया. वो अपने बूब्स दबा रही थी. मैने उसकी छूट के दाने को काट लिया. वो उछाल पड़ी. मैने अपनी 2 उंगलियाँ उसकी छूट में डाल दी, और ज़ोर-ज़ोर से आयेज पीछे करने लगा. वो थोड़ी देर में झाड़ गयी.
मैने उसके मूह पर 2 थप्पड़ मारे और उसके मूह से पनटी निकाल दी. वो हाँफ रही थी.
मे: मज़ा आया?
सिमरन: अभी पूरा मज़ा आना बाकी है.
मे: रंडी आज तुझे असली चुदाई का स्वाद चखता हू.
सिमरन: तुमने पहले ही मेरी हालत खराब कर दी है. जब तुम्हारा ये मोटा लंड मेरी छूट में जाएगा, तब कितना मज़ा आएगा.
मे: इतना मोटा लंड कभी लिया नही क्या रंडी अपनी छूट में?
सिमरन: नही, मेरे पति का तो इसका हाफ भी नही है.
मे: हाहाहा आज तेरी छूट आचे से खुलेगी.
सिमरन: हा, अब जल्दी करो, कॉलेज बंद हो जाएगा.
मैने उसको बेंच पे लिटाया, और उसकी छूट में अपना लंड सेट किया. फिर एक शॉट मारा तो सिर्फ़ टोपा ही अंदर गया. वो चिल्ला पड़ी.
सिमरन: हाए मॅर गयी!
मैने बोला: कुटिया धीरे चीख. किसी ने सुन लिया तो प्राब्लम हो जाएगी.
वो रोने लग गयी. मैने उसकी पनटी ली, और उसके मूह में डाल दी. फिर तोड़ा अपने लंड पे थूका और धीरे-धीरे लंड उसकी छूट में धकेल रहा था. आधा लंड अब अंदर जेया चुका था. मैने एक ज़ोरदार शॉट मारा और पूरा लंड उसकी छूट में उतार दिया. वो मचल पड़ी. मैने उसे कस्स के पकड़ लिया, और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा. पूरी क्लास में हमारी चुदाई की आवाज़ गूँज रही रही थी.
सिमरन: आ आआहह आहह आहह, और ज़ोर से, और ज़ोर से, मॅर गयी आज तो.
मे: क्यूँ कुटिया, आ रहा है मज़ा?
सिमरन: अया आहह बहुत मज़ा आ रहा है मेरे कुत्ते.
मे: चल कुटिया, डॉगी स्टाइल में आजा.
सिमरन: मुझे डॉगी स्टाइल में छुड़वाना ज़्यादा पसंद है.
5 मिनिट तक मेने उसको डॉगी स्टाइल में छोड़ा. फिर आइडिया आया, और मैने उसकी गांद खोला, और उसके अशोल पे थूक दिया. उसके बाद एक उंगली अंदर डालने लगा.
सिमरन: गांद में नही. तुम्हारा मोटा लोड्ा मेरी गांद की बंद बजा देगा.
मे: ठीक है आज तेरी गांद नही बजता.
मेरे दिमाग़ में खुराफात आई, और मैने उसकी गांद के च्छेद में पेन डाल दिया. वो आयेज भागने लगी. मैने उसकी कमर कस्स के पकड़ ली, और डॉगी स्टाइल में छोड़ता रहा.
5 मिनिट बाद वो ज़ोर से चिल्लाई आ आ आ आअहह आअहह. मैं समझ गया की वो झाड़ चुकी थी. पर मेरा अभी तक हुआ नही था. मैने उसे पोस्टीओं चेंज करने को बोला.
सिमरन: तुमने आज मुझे खूब मज़ा दिया है. अब मेरी बारी तुम्हे मज़ा देने की. तुम लेट जाओ बस, और मेरा कमाल देखो.
मैं लेता, और वो च्चिनाल मेरे लंड के उपर अपनी छूट लेके बैठ गयी. उसके बूब्स मेरे सामने थे. वो ज़ोर-ज़ोर से कूद रही थी, और उसके मोटे बूब्स उपर-नीचे झूल रहे थे. क्या नज़ारा था. मैने उसके बूब्स पकड़े, और निपल के पास वाले एरिया पे थप्पड़ मारा, और निपल पे चींटी काट दी. उसकी आँखों से आँसू आ गये फिर भी वो रुकी नही, और कूदती रही मेरे लंड पर.
मैने उसको अपने पास खींचा, और लीप किस करने लगा. मेरा होने वाला था. मैने उसको साइड में बैठने को कहा. वो कुटिया की तरह गांद मटका के साइड में बैठ गयी.
मे: बोल मेरी रंडी, कहा निकालु मेरे लंड का स्वादिष्ट माल? तेरी छूट में या तेरे मूह में?
सिमरन: मेरे पास उससे भी अछा आइडिया है.
मे: बोल क्या है तेरा आइडिया?
सिमरन: ये मोटे बूब्स कब काम आएँगे?
मे: समझा नही कुटिया, तू करना क्या चाहती है?
सिमरन: तुम बस मुझ पर छ्चोढो.
कुटिया की तरह चल कर वो मेरे पास आई, और अपने बूब्स के बीच में मेरे लंड को ले लिया. फिर ज़ोर-ज़ोर से बूब्स मेरे लंड पे रगड़ने लगी. उसके सॉफ्ट बड़े बूब्स में मेरा मोटा लंड च्छूप गया और 2 मिनिट में मैं झाड़ गया. मेरे माल की पिचकारी उसके मूह पे लगी, और तोड़ा माल उसके बूब्स में रह गया.
मे: कुटिया जो माल मूह पे है, उसको चाट के सॉफ कर कुटिया.
वो जैसे ही उठी, जो पेन मैने उसकी गांद के च्छेद में डाला था, वो निकल गया. इस्पे वो हस्स पड़ी.