डाइवोर्स बचाने के लिए नंदोई से चुदी

सेक्स कहानी स्टार्ट करने से पहले मैं आप सब को इस कहानी के बारे में बता डू. दरअसल बात ये है की मैं अपने पति से खुश नही थी. इसलिए मेरे पति के अलावा मेरे बहुत से चक्कर चालू हो गये थे.

तो एक बार मेरे पति ने मुझे चुदाई करते हुए देख लिया था, और उसके बाद हम दोनो के बीच में झगड़ा हो गया था. फिर बात डाइवोर्स तक आ गयी थी. सुबह का टाइम था और हम दोनो के बीच में बहुत बड़ी लड़ाई हो रही थी. तभी सारे घर वाले आ गये.

कभी मेरे ससुर जी ने मुझसे पूछा: बहू ये सब क्या है? तुम दोनो इस तरह क्यूँ लड़ रहे हो?

लेकिन मैने उनको कोई जवाब नही दिया, और चुप-छाप बैठी थी. तभी उन्होने राकेश की तरफ देखा और राकेश गुस्से में बोल पड़े-

राकेश: दाद मैं अंजलि से डाइवोर्स चाहता हू, और जल्द से जल्द ये रिश्ता ख़तम करना चाहता हू.

दाद: राकेश तुझे पता है तुम ये क्या बोल रहे हो?

राकेश: ये आप अपनी बहू से पूछो.

ससुर जी ने मेरी तरफ देखा. वो कुछ बोले, उससे पहले मैने राकेश से कहा की-

मैं: राकेश हमने जो साथ में लम्हे गुज़ारे है, वो तुम्हारे लिए कोई माइने नही रखते?

मेरे ये बोलने के बाद ससुर जी ने राकेश की तरफ देखा, तो वो और गुस्से में आ कर ये बोले-

राकेश: ओह अछा, तुमको वो लम्हे याद नही थे जब तुम्हारा एक पति होने के बाद भी तुम दूसरा पति बना रही थी?

ये सुन कर ससुर जी राकेश पर बहुत गुस्सा हो गये.

दाद: तुम्हे शरम नही आती अपनी बीवी के बारे में ऐसा बोलते हुए?

राकेश: जो सच है वही बोल रहा हू दाद.

मैं: प्लीज़ राकेश, इस तरह से तो बात मत करो.

दाद: बहू की तरफ देख, तेरी ये बातें सुन कर वो कितनी उदास हो गयी है. और उसकी आँखों से आँसू बह रहे है. तुझे कुछ फराक नही पड़ता वो रो रही है.

राकेश: मुझे फराक नही पड़ता, क्यूंकी उसने काम ही ऐसा किया है. अब मैं उसके साथ नही रहना चाहता. जल्दी से जल्दी ये रिश्ता ख़तम करना चाहता हू, और कुछ नही.

मैं: पर मैं ख़तम नही करना चाहती ये रिश्ता (तभी जीजा जी राकेश से बोले).

कुमार: राकेश देख, इतना जल्दी मत कर. तुम दोनो एक-दूसरे से बात कर लो. क्या पता तुम दोनो में सब ठीक हो जाए.

राकेश: जीजा जी आपको पता नही है. आप इसकी भोली शकल पर मत जाओ. ये बहुत बड़ी कमीनी है.

कुमार: अभी तू बहुत गुस्से में है. इसलिए तू ऐसा बोल रहा है.

राकेश: मैं भले गुस्से में हू जीजा जी. लेकिन मैं जो बोल रहा हू वो सब सच है.

मैं: नही ऐसा कुछ नही है राकेश. आपको ये ग़लतफहमी हुई है. असल में ऐसा कुछ नही है.

राकेश: अछा, मुझे ग़लतफहमी हुई है? तो फिर वो सब क्या था जो मैने देखा?

मैं: बोल तो रही हू वो आपकी ग़लतफहमी थी. असल में ऐसा कुछ नही है.

राकेश: अंजलि अब और झूठ मत बोलो. मुझे पता है तुम झूठ किस लिए बोल रही हो. लेकिन मैं हर हाल में तुमको डाइवोर्स दूँगा.

मैं: सिर नीचे की तरफ झुका दिया, और मेरी आँख आँखें नाम हो चुकी थी.

मुझे यकीन नही हो रहा था की मेरी शादी टूटने वाली थी. और मेरे अंदर से एक आवाज़ आई, की अंजलि नही-नही तुम इतनी जल्दी हार नही मान सकती.

दाद: तो ठीक है राकेश, तुझे बहू से अलग होना है तो एक बार मेरे कहने पर बहू को मौका दे.

कुमार: हा राकेश, क्या पता तेरे एक मौका देने से तुम दोनो की शादी-शुदा ज़िंदगी ठीक हो जाए.

राकेश: कुछ ठीक नही होगा. मैं एक बार ग़लती कर चुका हू दोबारा ग़लती नही करना चाहता. मैं बस इससे डाइवोर्स चाहता हू.

कुमार: लेकिन एक बार फिर ये मौका दे तो. इस बार मैं समझौगा अंजलि को, और वो समझ जाएगी.

राकेश: ठीक है जीजा जी. अगर आप कहते तो मैं आपकी बात मान लेता हू.

और फिर जीजा जी ने मुझे एक अलग रूम में बुलाए. हो सकता था जीजा जी की हेल्प से मेरी शादी टूटने से बच जाए. फिर मैं रूम में और बाकी सब घर वाले बाहर बैठे थे. रूम के अंदर मुझे जीजा जी ने एक कुर्सी पर बैठने को कहा.

कुमार: अंजलि पहले तुम आराम से इस कुर्सी पर बैठ जाओ रिलॅक्स हो कर, ओके?

फिर उन्होने मुझे पानी का ग्लास दिया. मैने आराम से पी लिया और फिर बोली-

कुमार: तो अंजलि ऐसा क्या हुआ है जो बात डाइवोर्स तक आ गयी? खुल कर बोलना, ओपन माइंड होके.

मैं पहले तो घबरा रही थी. लेकिन जीजा जी ओपन माइंड के थे, इसलिए मैं उनसे खुल कर बात कर पाई.

मैं: बात ये है, की राकेश ने मुझे अपने मौसी के बेटे के साथ सुहग्रात की सेज पर सेक्स करते हुए देख लिया था.

कुमार: ओह, अनु के साथ? लेकिन तुम अनु के साथ कैसे सुहग्रात तक पहुँच गयी?

मैं: वो उसकी होने वाली बीवी किसी और के साथ भाग गयी थी (रिया). और मुझे बड़ी सासू मा ने मजबूर किया था घर की इज़्ज़त बचाने के लिए.

कुमार: चलो ठीक है मान लिया की तुमको मजबूर किया था. लेकिन तुम तो सुहग्रात ही माना ली. ऐसा क्यूँ किया तुमने?

मैं: ऐसा नही करना चाहती थी मैं. लेकिन अनु रुके ही नही.

कुमार: अनु रुका नही की तुमने रोकने की कोशिश ही नही की?

मैं: कोशिश की थी, लेकिन वो नही माने.

कुमार: मुझे नही लगता तुमने उसे रोकने की कोशिश की होगी. अगर कोशिश की होती कुछ शायद, तो वो रुक जाता, और तुम्हारे साथ ये सब नही होता.

मैं: आपको नही लगता मैं इतनी खूबसूरत हॉट सेक्सी लड़की हू, की मुझे देख कर किसी की भी नीयत खराब हो सकती है.

कुमार: ऐसा नही है. अगर हम किसी और को रोक नही सकते, तो खुद को तो रोक सकते है.

मैं: इसका मतलब मैं हॉट सेक्सी नही हू?

कुमार: नही-नही मेरा ये मतलब बिल्कुल नही था. तुम तो बहुत हॉट सेक्सी हो, और बहुत बहुत खूबसूरत हो.

और फिर मैं जीजा जी के करीब आई, और वो भी मेरे करीब हुए, और अचानक से हमारी लीप किस हो गयी.

कुमार: ऊप्स, सॉरी, मुझे ऐसा नही करना था.

मैं कुछ नही बोली. बस सामने खड़ी थी. मुझे पता था की जीजा जी का सहारा लेकर मैं अपनी शादी बचा सकती थी. इसलिए मुझे जीजा जी के साथ करना पड़ेगा, तो मैं उनको उत्तेजित कर रही थी. और फिर वो मुझे लीप तो लीप किस्सिंग करने लगे. मैं भी उनका साथ दे रही थी.

कुमार: अर्रे ये मैं क्या कर रहा हू. मुझे अपने आप को रोकना होगा.

मैं: आप मुझसे डोर तो हॅट गये. लेकिन आपका लंड तो खड़ा हो गया है देखो. उसे कैसे रोकोगे?

कुमार: नही-नही, ये तो बस ऐसे ही. चलो अंजलि, मुझे ये बताओ क्या राकेश के अलावा सिर्फ़ अनु से ही किया है (मजबूरी में)?

मैं: अब आपसे क्या झूठ बोलू. पति के बाद अब तक के 5 हो गये है.

कुमार: तो आज तुम्हारा 6 नंबर लंड है?

मैं: क्या मतलब? आपका?

कुमार: सॉरी अंजलि, अब मैं खुद को रोक नही पा रहा हू.

इतना बोल कर वो मेरी और बढ़े, और मेरी छ्चाटी पर अपने दोनो हाथ रख दिए. फिर मेरे बूब्स को दबाने लगे, और किस्सिंग करने लगे. उसके बाद मेरी सारी का पल्लू हटा कर मेरे ब्लाउस को खोल दिया.

अब वो मेरी ब्लॅक ब्रा उपर कर दिए, और मेरे बूब्स के निपल अपने मूह में लेकर चूसने लगे. मेरे मूह से हल्की-हल्की आ ह आह की आवाज़ निकालने लगी.

कुमार: वाउ, क्या मस्त निपल है. तुम्हारे बूब्स बहुत बड़े है. मेरी कब से नज़र थी तुम्हारे बूब्स पर. चूसने के लिए बेचैन था इनको.

मैं: ओह अछा, तो इसलिए आप राकेश को समझा रहे थे?

कुमार: हा बिल्कुल. अगर इतनी सेक्सी लड़की मिले सेक्स के लिए, तो झूठ चलता है.

और फिर जीजा जी ने मेरी सारी उतार दी. अब मैं पेटिकोट में थी. उन्होने मेरा पेटिकोट भी उतार दिया, और मेरी ब्लॅक पनटी के उपर से मेरी छूट को रगड़ने लगे. थोड़ी देर में मेरी छूट गीली हो गयी, और जीजा जी मेरी पनटी उतार कर मेरी छूट को अपनी जीभ से चाटने लगे.

मेरे मूह से ह ह ह ह ह की सिसकियाँ निकालने लगी थी. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. जीजा जी अपनी पूरी जीभ मेरी छूट में घुसा रखे थे. वो मेरी छूट चाट-ते—चाट-ते अपनी जीभ से छोड़ने लगे थे.

माने अपने एक हाथ से जीजा जी का सिर अपनी टाँगों के बीच में दबाए रखा था. और दूसरा हाथ मैने अपने मूह पर रख दिया था, क्यूंकी मेरे मूह से ह ह की सिसकियाँ निकल रही थी, तो कहीं आवाज़ बाहर ना जाए इसलिए.

फिर जीजा जी उठे, और अपने कपड़े उतार कर नंगे हो गये. अब मेरी बारी थी अपने मूह से उनको मज़ा देने की. उनका लंड एक-दूं टाइट हो कर खड़ा था. वो मेरे मूह को बुला रहा था. लेकिन पहले मैने कुछ देर अपने हाथ से लंड को हिलाया. फिर जीजा जी का लंड मैने अपने मूह में ले लिया, और कुलफी की तरह चूसने लगी.

कुमार: अंजलि तुम्हारे मूह की गरम-गरम साँसें मुझे मेरे लंड पर महसूस हो रही है. चलो अंजलि अब तुम सीधी लेट जाओ. क्यूंकी तुम अगर ऐसे ही मेरा लंड चूस्टी रही, तो मैं झाड़ जौंगा. मेरा पानी निकल जाएगा. जो मैं नही चाहता. क्यूंकी मैं अपने लंड का पानी तुम्हारी छूट में छ्चोढना चाहता हू.

और फिर मैने वैसा ही किया. मैं सीधी नीचे लेट गयी, और अपनी दोनो टाँगें खोल दी. जीजा जी मेरे उपर आ गये. अपनी टाँगें मेरी टाँगों पर रख दी, और अपना लंड मेरी छूट के मूह पर सेट किया.

फिर वो आहिस्ते-आहिस्ते मेरी छूट के अंदर घुसने लगे. उनका लंड बड़े आराम से मेरी छूट के अंदर चला गया. वैसे मुझे ये मिशनरी पोज़िशन बहुत पसंद है. इस पोज़िशन में बूब्स को चूस सकते है, और किस्सिंग भी कर सकते है.

कुमार: सच में तुम्हारी छूट तो बहुत अद्भुत है. कितना मज़े से मेरा लंड अंदर जेया रहा है. तुम्हारी छूट बहुत गीली है, इसलिए बहुत ज़्यादा मज़ा आ रहा है चुदाई करने में. तुम्हे जो भी पहली बार छोड़ेगा, वो तुम्हारा दीवाना हो जाएगा. वो तुम्हे कभी नही भूलेगा.

मेरे मूह से ह ह ह आह ऑश उफ़फ्फ़ अहह आह ओह जीजा जी ह बहुत मज़ा आ रहा है आपका लंड बहुत मस्त है, निकल रहा था. करीब 15 मिनूट तक जीजा जी ने मुझे उसी पोज़िशन में छोड़ा. फिर अपने लंड का पानी मेरी छूट के अंदर ही छ्चोढ़ दिया. लंड का पानी काफ़ी गरम था.

तो फ्रेंड्स ये मेरी कहानी. कैसी लगी? अगर आप सब को पसंद आए तो प्लीज़ कॉमेंट कीजिएगा. मी गमाल अकाउंट इस अंजलिक़361@गमाल.कॉम. इस कहानी का नेक्स्ट पार्ट जल्दी ही आएगा.

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