हेलो दोस्तों, मेरा नाम आलिया है, और मैं अभी 24 साल की हू, बिल्कुल गोरी और चुलबुली. मैं दिखने में बहुत ही ज़्यादा सुंदर हू. मुझे हर लड़का लाइन मारता है. मेरे लिए बाय्फ्रेंड बनाना कोई बड़ी बात नही है, और मैं काई लड़कों के साथ डटे भी कर चुकी हू.
मेरे घर पर मम्मी, पापा और मेरे भैया है. भैया अभी जॉब करते है, और मम्मी घर पर हाउसवाइफ है. पापा से उनकी ज़्यादा नही बनती. वो ऑफीस जाते है, और टाइम से घर वापस आ जाते है.
पापा का नाम विजय है. वो लगभग 20 सालों से एक ही कंपनी में काम कर रहे है. जिसकी वजह से उन्हे एक हॉलिडे टिकेट मिला हुआ था, जिस पर दो लोग घूमने जेया सकते थे.
पापा मम्मी को घूमने के लिए ले जाना चाहते थे, पर मम्मी तैयार नही थी. मैं एग्ज़ॅम देकर घर पर ही बैठी हुई थी. तब पापा बोले की आलिया को ही साथ ले जाता हू. मैं बहुत खुश हुई और पापा के गले लग गयी.
दूसरे दिन ही हम दोनो निकल गये. मैं उसे दिन शर्ट और नीचे जीन्स पहनी हुई थी. मेरी बड़ी सी गांद जीन्स में उभरी हुई नज़र आ रही थी, और चुचिया तो जैसे वाइट शर्ट से बाहर ही निकल जाएगी.
पापा मेरी कमर में हाथ डाल कर एरपोर्ट पर चल रहे थे. मैं उनसे पूछी की हम लोग कहाँ जेया रहे है.
तब पापा बोले: ये बात सीक्रेट है. मैं अपनी बेटी को बहुत ही अची जगह घूमना चाहता हू.
मैं बहुत खुश हुई और उनके गले लग गयी. हमारी फ्लाइट उड़ान भारी और लगभग 2 घंटे बाद हम पहुँच गये, और अपने होटेल में चले गये. होटेल का नज़ारा बहुत ही अछा था. पास में ही समुंडरा की बीच थी.
उस दिन हम दोनो खाना खाए और होटेल के अगाल-बगल घूम कर रात को एक ही बेड पर सो गये. सुबह जब उठी तो देखी की मैं पापा की बाहों में पड़ी हुई थी. मुझे बहुत ही ज़्यादा एग्ज़ाइट्मेंट हुई, और मैने उनके गालों को किस कर ली. उन्होने आँखें खोल दी, और वो भी मेरे गाल को चूम लिए.
फिर पापा बोले: मेरी बेटी जाग गयी.
मैं: हा पापा अब बोलिए ना कहाँ घूमने चलना है?
पापा: हा हा वेट, घूमेंगे! आज तो पूरा दिन घूमना है. पहले कुछ खाना तो खा ले.
फिर हम लोगों ने खाना खाया और उसके बाद पापा ने मुझे एक ड्रेस दी पहनने के लिए. मैने ड्रेस पहन ली. उसमे एक त-शर्ट थी, जो मेरी नाभि के उपर ही थी, और गोरी-गोरी नाभि दिख रही थी, और एक स्कर्ट थी, जो मुश्किल से जांघों तक भी नही आ रही थी.
अंदर मैने लाल रंग की ब्रा और पनटी पहनी हुई थी. पापा ने मुझे एक गोल टोपी दी, और खुद त-शर्ट और बॉक्सर पहन कर हम लोग साथ चल दिए. कुछ ही देर में हम लोग बीच पर आ गये.
पापा बोले: यहाँ पर लोग खुल कर एंजाय करते है. तुम्हारी मम्मी के साथ आता तो यहाँ नही किसी मंदिर जाना पड़ता. पर तुम खुले विचारों की हो, इसलिए यहाँ पर आया. यहाँ पर ना उमर का फांसला है, और ना ही रिश्तो का दबाव.
पापा बिल्कुल ठीक कह रहे थे. यहाँ पर 80 साल का बुद्धा भी 18 साल की लड़की के साथ ही नंगा लेट कर खूब एंजाय कर रहा था. मुझे देख कर खूब मज़ा आया. फिर पापा थोड़ी देर में आता हू बोल कर कहीं चले गये, और मैं वहीं खड़ी रही.
आस-पास आते-जाते गोरे लोग मुझे बड़े घूर कर देख रहे थे. मेरी नाभि और जांघों को मसल देना चाहते थे, की तभी पापा एक बोट स्कूटर लेकर आ गये.
मैं बहुत खुश हुई, और जेया कर उस बोट स्कूटर के पीछे बैठ गयी. मैं पापा को पकड़ ली, और उन्होने बहुत तेज़ चलना शुरू कर दिया. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैं पापा को पकड़ के उपर खड़ी हो गयी, और ज़ोर से चिल्ला कर हस्स पड़ी. पापा भी हासणे लगे.
मैं पापा को पीछे से पकड़ कर अपनी चुचियाँ उनकी पीठ में रगड़ते हुए उनके गाल को किस करने लगी और कान को काटने लगी.
फिर उनके कान के पास बोली: पापा योउ अरे थे बेस्ट.
ये बोल कर उनके गाल पर किस की बरसात करने लगी. तभी उन्होने अपना चेहरा मेरी तरफ घुमाया तो हम दोनो के होंठ मिल गये. पर मैं रुकी नही, और उनके होंठ को भी चूम ली.
पापा: आज मेरी बेटी बहुत खुश है. मैं इसी तरह अपनी बेटी को हमेशा खुश देखना चाहता हू (और वो मुस्कुराने लगे).
मैं उनके आयेज चली गयी, और उनकी गोद में बैठ गयी. मेरी स्कर्ट उपर उठ गयी थी, और पनटी उनके लंड पर रग़ाद खाने लगी थी. वो भी सिर्फ़ एक बॉक्सर में थे. उनकी बाहों में आयेज से पड़ी हुई थी, और गले लगी थी. पापा बोट बिके को और तेज़ चला रहे थे. मैं उनके गाल को कभी कान को किस करती और हवा में झूमने लगती.
पापा हासणे लगे, और बिके को तेज़ चलाने लगे. थोड़ी देर बाद वो बोट समुंडरा के किनारे रोके और वहाँ पर उतार गये. मैं देखी की वहाँ उँचे-उँचे पहाड़ थे, और थोड़ी सी ज़मीन थी. और बाकी चारों तरफ पानी था, और वहाँ कोई लोग थे ही नही.
पापा ज़मीन के पास लेट गये. समुंडरा के पानी की लेहायर आती और पापा को भिगो देती. मैं भी खुशी के मारे उनके उपर लेट गयी और उन्हे बाहों में पकड़ ली.
मेरी त-शर्ट भीगने की वजह से अंदर की लाल ब्रा पापा देख चुके थे, और स्कर्ट इतनी छ्होटी थी, की काई बार पापा को मेरी पनटी के दर्शन हो चुके थे. मैं पापा पर लेती हुई उनके गाल को चूमते हुए बोल रही थी-
मैं: पापा योउ अरे थे बेस्ट. आज मुझे बहुत खुशी मिली.
तभी पापा मुझे गालों को चूमते हुए बोले: आज मैं अपनी बेटी को सारी खुशियाँ देना चाहता हू.
ये बोलते हुए पापा ने मुझे नीचे लिटाया, और खुद मेरे उपर आ कर मेरे पैरों के बीच आ गये. फिर मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए. मेरी आँखें बंद हो गयी. समुद्रा के किनारे पानी की लहरें हम दोनो को भिगो रही थी. उँचे-उँचे पहाड़ों के बीच कोई आने वाला नही था.
हम दोनो मस्ती में एक-दूसरे के होंठ चूसने लगे. पापा मेरे पैरों के बीच अपने लंड को ऐसे रग़ाद रहे थे, जैसे पैंटी के उपर से ही लंड घुसा देंगे. फिर पापा मेरे होंठ को चूमते हुए मेरी त-शर्ट को उतार दिए, और ब्रा को खोल कर मेरी चुचियों को हाथो में पकड़ कर चूसना शुरू कर दिए.
मैं आँखें बंद करके उनके बालों को सहला रही थी, और वो मेरे निपल्स को चूस रहे थे. मैं इतने सारे बाय्फ्रेंड बनाई थी, पर किसी ने इस तरह चुचियाँ नही चूसी थी.
आज मुझे अलग ही मज़ा आ रहा था. पापा लगातार मेरी चुचियों को चूस्टे हुए नाभि को चूमे. उसके बाद स्कर्ट उतार कर मेरी पैंटी भी उतार दी, और मुझे नंगी कर दिया. वो मेरे पैरों को फैला कर मेरी छूट देखने लगे.
मेरी छूट बिल्कुल सॉफ थी, और गोरी भी. उसके अंदर गुलाबी-गुलाबी नज़र आ रही थी. पापा उंगलियों से मेरी छूट को फैला कर देखने लगे, और अपना बॉक्सर उतार कर लंड छूट पर रगड़ने लगे. मैं तो जैसे सातवे आसमान पर पहुच गयी थी.
पापा मेरी छूट पर रगड़ते हुए लंड को धीरे-धीरे अंदर डालने लगे. मेरी छूट पहले से ही पानी छ्चोढ़ कर रस्स-दार हो चुकी थी. वो मेरे उपर झुक गये और मेरे होंठो को चूस्टे हुए धीरे-धीरे लंड को अंदर घुसा दिए.
नया लंड था इसलिए थोड़ी तकलीफ़ हुई, पर थोड़ी ही देर बाद मुझे मज़ा आने लगा. पापा के नीचे डब कर चुदाई करवाने का मज़ा ही कुछ अलग था. उपर से ये खुला आसमान और समुंडरा का किनारा उफफफफफफ्फ़…
पापा मुझे लगातार छोड़ते रहे. उसके बाद मुझे उल्टा लिटा दिया, और मेरे छूतदों को पकड़ कर मेरी चूत में लंड डाल कर छोड़ना शुरू कर दिया. मेरे गालों को चूम कर मुझे छोड़ रहे थे.
मैं: हाए पापा आ, छोड़ो आहह.
पापा लगातार छोड़ कर मेरे उपर ही झाड़ गये. फिर मेरे उपर लेट कर हाँफने लगे. फिर मैं उठी, और उनके लंड को चूसने लगी. उनका लंड बहुत बड़ा था. मेरे मूह में मुश्किल से आ रहा था. करीबन 10 मिनिट चूसने के बाद उनका लंड फिर से टाइट हो गया. वो मेरे उपर आए, और फिर से मेरी चुदाई शुरू कर दी.
आज अपने पापा के लंड लेकर मैं बहुत खुश थी. काफ़ी देर तक पापा मेरी चुदाई करने के बाद हम लोग वहीं पर नहाए. उसके बाद अपने कपड़े पहन कर बोट स्कूटर से फिर से होटेल के पास आए, और अपने कमरे में जेया कर एक बार फिर से चुदाई किए.
इस एक हफ्ते में पापा ने मुझे खूब छोड़ा, और मज़ा किया. च्छुतटी ख़तम होने के बाद घर पर हम फिर से बाप बेटी बन गये, और बहुत ही शरीफ बन कर रहते थे. पर जब भी हम दोनो को अकेलापन मिलता था, तो खूब मज़े से नंगे हो कर चुदाई करते, और उसके बाद एक-दूसरे के साथ ही सोते.