भाभी हुई मिलन के लिए तैयार

मैने अपना लंड संभाला जो उनको दिख रहा था. मेरा तोड़ा सा लंड का पानी उनके पीछे उनकी गांद वाले हिस्से के पास चड्डी में लग गया था, जिससे उनको गीला लग रहा था. तभी उन्होने मुझे कहा-

भाभी: तूने पीछे क्या किया मेरे साथ?

मैने कहा: कुछ नही हुआ भाभी. बस थोड़ी ग़लती हो गयी. वो तो आप सो रही थी, इसलिए मुझसे रहा नही गया, और मैं आपके कमरे में आपके बेड पर आ कर बैठ गया. मुझे पता नही क्या हुआ की मैने ये कर दिया आपके साथ. भाभी माफ़ कर दो प्लीज़. फिर नही होगा.

अब आयेज-

भाभी मेरी अब कहाँ सुनने वाली थी? उनको तो अब यकीन हो गया था की मैं उनके साथ सोना चाहता था. गुस्से में भाभी जब मुझे देख रही थी, तो थोड़ी-थोड़ी उनकी आवाज़ डब रही थी. मुझे लग रहा था घबरा कर शायद कुछ बोल नही पा रही थी. क्यूंकी उनकी आवाज़ डाउन-डाउन सी और दर्र जैसी फील आ रही थी.

मुझसे वो 4 कदम डोर थी. लेकिन उनकी साँसे मुझे महसूस हो रही थी, की उनकी क्या हालत थी मुझे उनसे चिपक कर सोते हुए देख कर. वो जब चुप हुई, तो मैने उन्हे देखा और कहा-

मैं: भाभी मुझे नही पता आपको देख कर क्या हो गया था. मैं तो सिर्फ़ आपको देख रहा था. पता नही कैसे मैं आपके साथ सो गया. और फिर रहा नही गया तो मेरा हाथ आपके कपड़ों पर चला गया. लेकिन मेरा कोई इरादा नही था.

मैं उनके करीब आया. करीब आ कर मैने उनकी आँखों में देखा, और उनके होंठो को देखा. वो हल्की सी घबरा गयी, और पसीना छ्छूट रहा था उनका. मैने फिर उनके करीब आकर उनको कहा-

मैं: भाभी प्लीज़ किसी को कहना मत. मैं बस आपको देखना चाहता था. मुझे पता नही आपको देखते ही कुछ-कुछ होता है. मैं बता नही सकता जब आप मेरे सामने से निकलती हो तो मैं आपको और आपकी कमर को पीछे से देखता रहता हू. आपकी ब्लाउस का वो खुला हुआ हिस्सा जिससे आपकी पीठ मुझे दिखती है, और आपकी ब्रा का एक स्ट्रॅप, जो बाहर आ रहा था, वो मुझे पता नही कुछ-कुछ करवा रहा था.

भाभी: तूने आज जो किया है, वो बहुत ही ग़लत किया है. मुझे यकीन नही हो रहा है. तूने मेरे साथ मेरे कपड़ों को उपर करके जो किया है, वो मैं सोच भी नही सकती. तू मेरा देवर है. मैं तेरी भाभी हू, और तुझसे बहुत बड़ी हू. लेकिन मेरे साथ..!

भाभी: तूने मेरे कपड़ों में कुछ निकाला है. मुझे गीला-गीला लग रहा है. तू जेया मेरे कमरे से, कोई आ गया तो फोकट में हुंगमा हो जाएगा. जो हमारे लिए अछा नही है. मुझे लगा तू सिर्फ़ मेरी चड्डी में ही खुश है. लेकिन पता नही था तू मुझ तक ऐसे करने पहुँच जाएगा. क्या चाहता हा तू? मेरे साथ सोना चाहता है?

उन्होने एक-दूं से पूच लिया. मैं हड़बड़ा गया था, और थोड़ी सी गर्दन हिला दी. उनकी आँखें बड़ी और भोचक हो गयी, और कहा-

भाभी: ठीक है, अगर मैं तुझे सोने डू तो तू खुश हो जाएगा? और फिर कुछ करेगा तो नही? यही चाहता है ना? मैं तेरे साथ सोने को तैयार हू. लेकिन मेरी एक शर्त है.

मैं: क्या?

भाभी: जब कोई घर में नही होगा, तब तू मेरे पास सोएगा. चाहे कुछ भी हो, ना तो तू मेरे पास आएगा और ना ही तू मुझे घूरेगा.

मैं: लेकिन भाभी जब आप सामने होती हो तो मैं खुद को कैसे कंट्रोल करू? मुझसे आपको देख के नही रहा जाता है.

भाभी: मैं कुछ नही जानती. तुझे अगर मेरी बात मंज़ूर है तो बोल?

मैं: भाभी फिर मेरी भी एक शर्त है.

भाभी: नही कोई शर्त नही. तुझे मंज़ूर हो तो हा कर, नही तो मैं कभी भी ये दोबारा नही कहूँगी. पर क्या बोलना चाहता है तू?

मैं: ठीक है भाभी, मुझे मंज़ूर है. जब कोई घर में नही होगा, तब आप मेरे साथ सोएंगी. लेकिन जो मैं करूँगा, उसमे आप मुझे नही रोकॉगी. ना माना करोगी. ना मुझे आँखें दिखावगी. मैं आपको भाभी नाम से नही बूलौँगा. मैं आपको सिर्फ़ आपके नाम से बूलौँगा. मेरी हर बात मनोगी, तब जेया कर मैं आपकी शर्त मानूँगा.

भाभी (बहुत देर तक सोचने के बाद): लेकिन ये बात तेरे और मेरे बीच ही रहेगी. किसी को इसके बारे में खबर नही लगनी चाहिए. किसी को भी. ना तेरे भैया को. ना मम्मी, ना पापा, किसी को नही.

मैं: ठीक है भाभी. मुझे मंज़ूर है. लेकिन मैं कुछ भी करू, आप मुझे नही रोकॉगी, चाहे वो आपके कपड़े हो या आपका शरीर.

भाभी ने आँखें दिखाई और नीचे गर्दन करके हा ठीक है कहा. फिर मैने कहा-

मैं: अब अगर यहाँ हमे कोई देख नही रहा है, तो मैं भाभी आपको किस करना चाहता हू आपके होतो पर, और आपकी जीभ चूसना चाहता हू.

भाभी: नही, कोई आ जाएगा.

मैं: भाभी हमारी बात हुई थी. आपने कहा था मेरी बात मानोगी. घर में कोई नही है, सिर्फ़ मम्मी है जो उनके कमरे में सो रही है. तो क्या मैं कर सकता हू?

भाभी ने तोड़ा सा सोचा, और कहा ठीक है. फिर मैं भाभी के करीब आया, और धीरे-धीरे उनके होंठो की और बढ़ने लगा. अपना मूह मैं भाभी के मूह के पास लाया ही था, की किसी के आने की आवाज़ आई, और मैं तुरंत भाभी के कमरे से भागा. वहाँ से निकल कर मैं अपने कमरे में भाग गया.

भाभी ने मुझे करीब आते देख अपनी आँखें बंद कर ली थी. लेकिन मैं उन्हे किस नही कर सका. क्यूंकी उनके कमरे में उनके बच्चे आ गये थे, जिनकी आवाज़ सुन कर मैं निकल गया. फिर बाद में भाभी से मिला जब भाभी शाम का खाना बनाने किचन में गयी.

मैं उनके पीछे देखते हुए गया की कोई किचन में आ तो नही रहा था. उन्होने मुझे किचन में आते हुए देख लिया, और खुद किचन की स्लॅब पर अपना हाथ टीका कर मुझे देखते हुए देखने लगी.

मैं धीरे से उनके करीब गया, और उनकी कमर पर हाथ डाल कर उनके और करीब आ गया. मैं उनसे इतना क्लोज़ था की मेरा शरीर उनसे चिपक गया था. उनके बूब्स मुझे महसूस हो रहे थे. उनकी कमर पर हाथ घूमना किसी कामयाबी से कम नही था.

मैं उनकी कमर पर लगातार हाथ घुमा रहा था, और वो सिर्फ़ मुझे देख रही थी. मैं उन्हे देख भी नही पा रहा था, क्यूंकी वो सिर्फ़ मुझे ही देख रही थी.

मैने उनकी कमर पर चुटकी काटी, और उनकी आँखें बंद हुई और एक हल्की सी आवाज़ आ… निकली. मैने एक बार और काटी. फिर से मुझे आवाज़ आई-

भाभी: आहह, क्या कर रहा है? चींटी क्यूँ काट रहा है? जो करना है वो कर, और जेया यहाँ से. कोई आ गया तो मॅर जाएँगे. मुझे खाना भी बनाना है.

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