भाई के ऑफीस में गंगबांग की कहानी

ही दोस्तों, तो चलते है सेक्स कहानी पर.

खाने के वक़्त भैया को कल ऑफीस के अलावा कॉलेज जौंगी बोलने से भैया को गुस्सा आ गया था. खाने के बाद सब अपने रूम में सोने चले गये, और मैं बर्तन ढोने चली गयी.

बर्तन धो कर मैं बातरूम जेया रही थी की तभी सूरज भैया ने मुझे पकड़ लिया, और वहीं बातरूम में ले गये. तभी उन्होने मुझे बाहों में पकड़ा, और बोले-

सूरज: साली रांड़, कॉलेज जाएगी तू! रुक तुझे तो मैं बताता हू.

और इतना कह कर उन्होने मुझे झुका दिया, और मेरा लेगैंग्स नीचे खींच के बस 1 झटके में अपना लंड मेरी गांद में पेल दिया. अब मैं आह ह आराम से भैया आह बस ऐसे ही करने लगी. तभी भैया ने मेरी टॉप फाड़ दी, और मुझे खड़ा करके पीछे से काटने लगे. फिर वहीं दीवार से सता कर बस ज़ोर-ज़ोर से मेरी गांद मारने लगे.

मैं बस आह ह भैया आराम से आह प्लीज़ आह ऐसे ही चिल्ला रही थी. वो 30 मिनिट तक मुझे यू ही छोड़ते रहे, और अपना पानी मेरे मूह में छ्चोढ़ कर वहाँ से चले गये.

मैं भी बातरूम हो कर चुप-छाप अपने रूम में आ कर सो गयी. सुबह मैं कॉलेज निकल गयी. दिन भर कॉलेज के बाद में घर आ रही थी. तभी मुझे मेरा बाय्फ्रेंड मिला जिसके साथ भैया ने मुझे पकड़ा था.

मैं उसे देख कर रुक गयी. वो मेरे पास आ कर बोला: रश्मि तुम कहाँ थी? मैं तुमसे शादी करना चाहता हू रश्मि. हम भाग चलते है. वैसे भी तुम्हारा भाई तुम्हे तकलीफ़ दे रहा होगा ना?

मुझे भी उसकी बात सही लगी, और मैं उसकी बातों में आ कर दूसरे दिन कॉलेज जाने की बजाए सीधा हम भाग गये, और मंदिर में शादी कर ली. मेरे भाग कर शादी करने से मामा गुस्सा हो गये, और घर आने से माना कर दिया.

मैं अपने पति के साथ दूसरे गाओं उसके घर चली गयी. आज हमारी सुहग्रात थी. मैं साज-धज कर बेड पर घूँघट ओढ़े हाथ में ग्लास लिए पति का इंतेज़ार कर रही थी. तभी वो रूम में आ गये और घूँघट उठा कर ग्लास हाथ में लेकर पी गये.

पर जैसे ही मैने उनकी तरफ देखा, मैं हैरान हो गयी, क्यूंकी वो सूरज भैया थे. मैं चिल्लाते हुए बोली-

मैं: भैया आप यहाँ कैसे? मेरे पति कहाँ है.

तभी भैया ने मेरे पैर खींचे और मुझे अपने पास खींच लिया. वो एक-दूं से बिना सारी निकाले, बस मेरी टाँगें अपने कंधे पर ले लिए, और एक झटके में अपना लंड मेरी छूट में पेल दिया. फिर मैं आह आह भैया छ्चोढो आह आह बस ऐसे ही बोलने लगी.

भैया बस बिना कुछ सोचे मुझे पेले जेया रहे थे, और मैं आह आह भैया आह आह ऐसे ही बोलते हुए उनके सीने पर हाथ फेर रही थी.

20 मिनिट के बाद भैया उठे, और मैं एक-दूं से रूम से बाहर गयी. पर भैया ने मेरी सारी खींची और मैं बस घूमती हुई रूम से बाहर गयी. और तभी भैया पीछे से आए, और मुझे पकड़ कर मुझे वहीं सोफे पर पटक दिया, और घोड़ी बना कर मुझे सोफे पर छोड़ने लगे.

मैं बस आह आह भैया ह भैया, मेरी शादी हो गयी है भैया, आह आह. और तभी भैया ने मुझे एक थप्पड़ मारा और बोले-

सूरज: साली तू रखैल है मेरी. तेरा पति भी मैं हू और तेरा मलिक भी मैं हू. तेरी औकात में रह, समझी ना रांड़?

और वो बस फिर से मेरी गांद में अपना लंड डाल दिए और छोड़ने लगे. भैया ने उस रात भी मुझे 4 बार छोड़ा, और मेरे उपर ही मूट दिए थे. सुबह जब मैं उठी तो मैं घर के हॉल में नंगी पेशाब में पड़ी थी. मैं उठी और नहा कर बातरूम से बाहर आई.

तभी भैया मेरे सामने आ गये. भैया ने मुझे एक कोट और पंत दी, और बोले: चल रंडी ये पहन और ऑफीस चल. आज मीटिंग है एक इंपॉर्टेंट.

और उसके बाद वो मुझे नाश्ता खिला कर ऑफीस ले गये. मैं अब जान चुकी थी की अमित यानी मेरे पति ने भी मुझे धोखा दे दिया था. अब तो मेरे पास भैया की बात मानने के अलावा कोई दूसरा ऑप्षन ही नही बचा है.

ऑफीस आते ही मैने देखा 4 आदमी भैया के ऑफीस में बैठे थे. हमारे जाते ही 10 मिनिट में मीटिंग चालू हो गयी. 2 घंटे तक मीटिंग चालू और उसके बाद भैया उनसे हाथ मिला कर बाहर जाने लगे.

मैं बस वहीं बैठी रही. फिर जैसे ही भैया ने दरवाज़ा लगाया, बस वो 5 लोग उठे, और मुझे पकड़ लिया. वो एक-एक करके अपना लंड मेरे मूह में देने लगे. और मैं भी अम्म्म अम्म्म उम्म्म उम्म्म अम्म्म करते हुए सब के लंड चूसने लगी.

और अचानक उन्होने मुझे 1 सेकेंड में ही नंगा कर दिया. फिर सब मेरे उपर टूट पड़े. कोई मेरे बूब्स चूस रहा था, काट रहा था. कोई मेरे होंठो को काट रहा था, कोई मेरी छूट चाट रहा था, तो कोई गांद.

मैं बस आह अहह उफ़फ्फ़ उफ़फ्फ़ आऊ अओ ऐसे ही चिल्ला रही थी. 2 मिनिट बाद उनमे से एक नीचे लेट गया और मैं उसके लंड पर कूदने लगी. मैं आह हह एस्स उफ़फ्फ़ यू ही मोन कर रही थी.

तभी उसने मुझे नीचे झुकाया, और किस करने लगा. फिर बस इतने में कोई मेरे पीछे से मेरी गांद में लंड डाल रहा था. उसके लंड डालते ही मैं खड़ी हो गयी, और आह ह निकालो ह आह बस ऐसे ही चिल्लाने लगी.

तभी उनमे से एक ने अपना लंड मेरे मूह में तूस दिया. अब मैं हर जगह से चुड रही थी मेरी छूट, गांद, मूह हर जगह लंड अंदर-बाहर हो रहे थे. और मैं बॅस गप्प गप्प्प गौ ग्ौउ ग्ौउ कर रही थी.

तभी मेरे मूह में जिसका लंड था वो झड़ने लगा, और मैं सब पी गयी. ऐसे ही एक-एक करके सब मेरे मूह में झड़ने लगे. 4 घंटो तक पाँच लोग मुझे छोड़ते रहे. वो कभी मेरी गांद मारते, कभी छूट छोड़ते, तो कभी मेरा मूह. मैं बस आह ह फुक्ककक उफ़फ्फ़ आह अम्म्म ऐसे ही चिल्ला रही थी.

4 घंटे बाद सब ने मुझे बिता लिया और मेरे मूह में एक-एक करके अपना पानी छ्चोढने लगे. फिर उसके बाद मेरे उपर ही मूतने लगे. सब का होने के बाद वो अपने कपड़े पहन कर चले गये. और मैं बस वहीं पड़ी रही, और थोड़ी देर बाद उठ कर बातरूम में नहाई और ऑफीस सॉफ किया. उस दिन के बाद भैया ने मुझे अपनी रखैल बना कर रखा, और रोज़ मुझे छोड़ते चुड़वते.

error: Content is protected !!