अंजान अंकल के साथ जंगल में चुदाई की कहानी

ही फ्रेंड्स, लास्ट पार्ट्स को प्यार देने के लिए थॅंक्स. अगर आप नये है, और फर्स्ट टाइम पढ़ रहे है, तो इस स्टोरी के आयेज के पार्ट्स जीजू की कंजूसी सीरीस में पढ़ ले. सो लेट’स स्टार्ट और नेक्स्ट पार्ट.

पापा को मैने अंकल की हेल्प से दूसरी जगह भेज दिया था, और अंकल के साथ उनकी बेटी का रॉल्प्ले करने का बोला. अंकल ने ड्रिंक कर रखी थी, और स्मेल आ रही थी. सो मैने उन्हे किस्सिंग के लिए माना कर दिया, और अपनी गांद के लिए भी. क्यूंकी उनका बड़ा सा लंड मैं अभी पीछे लाइन के लिए रेडी नही थी.

फिर मैं अपने पैर फैला कर वहाँ लेट गयी. अंकल ने अपना लंड सेट किया मेरी छूट पे, जो पूरी गीली हो चुकी थी. इसका एक ही मतलब निकलता है, की मेरी छूट चूड़ने के लिए रेडी थी. मतलब की अंकल का मोटा लंड देख कर ही मेरे हॉर्मोन्स में खलबली मच गयी उसको अंदर लेने के लिए.

आक्च्युयली, मैने जब पॉर्न देखी थी, तो उसमे बड़े लंड से छूट को चूड़ते देखा था. और जब पापा ने फर्स्ट टाइम मेरे साथ किया, तो मुझे मॅन में था की शायद उनका भी बड़ा सा होगा, पर वो मिला नही. और वो अधूरी इक्चा शायद आज पूरी होने जेया रही थी.

अंकल ने मेरी छूट पे अपना हात्ोड़े जैसा लंड रखा, और उसे अंदर धक्का दिया. वो छूट की दीवार को चीरते हुए अंदर चला गया. मेरे मूह से हल्की चीख निकल गयी. अंकल ने अपने हाथ से मेरा मूह बंद कर दिया.

अंकल: क्या हुआ, तुम्हारी छूट तो मस्त टाइट सी है. क्या नवीन तुम्हे नही छोड़ता?

मे: नवीन?

अंकल: अर्रे बेटी सुरभि, तुम्हारा हब्बी, जिससे तुम्हारी शादी हुई है अभी, और जो तुम्हे अभी घोड़ी बना कर ले रहा था तुम्हारी.

मे: अछा नवीन (अंकल मुझे सुरभि और पापा को सुरभि का हब्बी नवीन बता रहे थे).

अंकल: क्या नवीन तुम्हे नही छोड़ता है टाइम पे?

मे: पापा, नवीन के पास मुझे छोड़ने का टाइम तो है, पर आपके जैसा बड़ा लंड नही है.

अंकल: ओह बेटी, मुझे पता होता की तुम बड़े लंड के लिए तड़प रही हो. तो शादी से पहले ही तुमको सुहागन बना देता. तेरी मों तो अब मेरा उतना ले नही पाती. इसलिए मैं तुझे उसकी जगह पे रोज़ छोड़ता रात को.

अंकल इस बात-चीत के दौरान तोड़ा सा लंड अंदर-बाहर कर रहे थे. फिर अचानक से लंड को अंदर दबाया, तो उनका आधा लंड मेरी छूट में समा गया. मैं थोड़ी झटपटा सी गयी. अंकल ने कुछ देर तक वैसे ही रखा, और फिर आधे तक ही उसे अंदर-बाहर करने लगे, और मैं आ आ मोन करने लगी.

मे: एस डॅडी. फक मे. जो लंड मोविए में देखा है, वैसा पहली बार ले रही हू. आ आ आज सुरभि को पूरा अपना बना लो दादी, अपना बना लो मुझे.

अंकल: एस सुरभि बेटा. पर तुझे पूरी तरीके से अपना बनाने के लिए मुझे पूरा अंदर डालना पड़ेगा. क्या इसे पूरा ले पावगी अपनी छूट में?

मे: एस डॅडी. लाइफ में कभी ना कभी तो ऐसा बड़ा लेना ही था, मुझे. तो आपका ही सही. ई आम रेडी पापा. गिव में ऑल.

और फिर अंकल ने नेक्स्ट स्ट्रोक में अपना लंड, जो मेरी हाफ छूट को खोल चुका था, उसे धीरे-धीरे करके अंदर तक दबाते हुए, पूरा मेरे अंदर डाल दिया. छूट की दीवारों को चीरता हुआ उनका बड़ा काला लंड अंदर जेया कर मेरी बच्चे-दानी को दस्तक देने लगा.

मेरी आँखों में आँसू, और चेहरे पे शिकन आ गयी. और पाईं और जलन तो इतना था छूट में, की मैं बता नही सकती. अंकल ने मेरा हाल देख कर अपना लंड बाहर निकाला. इससे मुझे तोड़ा रिलॅक्स हुआ. और पूरा लंड बाहर निकालने के बाद, नेक्स्ट सेकेंड ही पूरा लंड वापस छूट में डाल कर मुझे धना-दान छोड़ने लगे.

मेरे मूह से आवाज़ निकले उसके पहले ही उन्होने मेरे मूह में मेरी पनटी डाल कर उसे खामोश कर दिया. फिर मेरी सिर्फ़ उः उः की आवाज़ निकल रही थी. अचानक से हुई इस चुदाई से मेरे होश ही उडद गये, और कुछ सेकेंड्स तो मैं ब्लॅकाउट हो गयी.

फिर जब होश आया, तो मेरी आँखों के सामने आसमान था, और तारे टिमटिमा रहे थे. ठंडी हवा चल रही थी, और मेरे उपर एक अंजन आदमी चढ़ कर आयेज-पीछे हो रहा था. कुछ देर के बाद जब सब रीकॉल हुआ, तो मैं जैसे पूरी वापस आ गयी हू कहीं से.

अब पाईं की जगह मैं चुदाई को एंजाय करने लगी. अंकल ने मुझे रिलॅक्स जान कर मूह से पनटी निकली, तो मैं उनके हर स्ट्रोक के साथ मोन करने लगी.

अंकल: मुझे लगता है बेटा की वो चूतिया नवीन झूठ बोल रहा था की तुम एक रंडी हो. और पैसों से चुड़वति हो. अगर ऐसा होता तो तुम्हारी छूट पूरी खुली हुई होती.

मे: एस पापा. सही कहा आपने. नवीन के बाद ये 2न्ड लंड है, जो मेरी छूट में जेया रहा है, आ.

मे: पापा, एक बात बताओ मुझे. शादी से पहले कभी आपने मुझे चुदाई की नज़रों से देखा था? (मैं जानना चाहती थी, की क्या अंकल भी पापा की तरह अपनी बेटी की लेना चाहते थे या नही)

अंकल: नही बेटा.

मे: सच बताओ डॅडी. आपको मेरी कसम. कभी मेरे बूब्स देख कर, या मेरी गांद देख कर, या मुझे कभी टच हुआ और आपको कुछ इक्चा हुई हो मेरे लिए? (और मैं उनका हाथ मेरे बूब्स पे रख कर डबवाने लगी)

अंकल: ऐसा बेटा सुरभि. तुझे छोड़ने वाला मॅन तो नही किया. पर तुम्हारे बूब्स एक दो बार देख कर उन्हे पूरा नंगा देखने की इक्चा ज़रूर हुई थी (अंकल की स्ट्रोकिंग भी साथ में चालू थी).

मे: ह्म, एस दादी, वहीं से तो शुरुआत होती है. पहले मुझे नंगा देखते आ. फिर मेरे बूब्स को टच करते आ. उसके बाद मुझे अपना लंड टच करवाते आहह. और फिर मौका मिलते ही मुझे पकड़ कर अपने बेडरूम में ले जाते आ. और जिस बेड पे मों चुड्ती है, उसी पे मुझे पटक कर छोड़ देते. आ डॅडी, छोड़ो मुझे. आज अपनी बेटी की छूट का भोंसड़ा बना दो आ आ.

मेरी वर्डिंग्स के साथ अंकल ने अपने स्ट्रोक्स को और तेज़ कर दिया. फिर मेरे बूब्स को दबाते हुए मुझे ज़ोर-ज़ोर से छोड़ रहे थे. मुझे भी नही पता की मेरे अंदर ये सेक्स का नशा इतना कैसे चढ़ गया. शायद ये अंकल का मोटा सा लंड देख कर उसको अंदर सामने की इक्चा थी, या फिर जो पापा ने मुझे रंडी बना दिया अपने शब्दों से, उसका बदला लेने के लिए. मुझे नही पता, पर मैं उस वक़्त अंकल से एक रंडी की तरह ही चुड रही थी.

अंकल: सच बताना सुरभि, पापा के बड़े लंड से चूड़ने में मज़ा आ रहा है ना?

मे: एस पापा. पहली बार ऐसा लंड मैने अंदर लिया है. ये तो नवीन (मीन्स के पापा) से भी बड़ा है. अगर ये असली सुरभि को मिल जाए, तो उसको भी मज़ा आ जाएगा.

अंकल: एस बेटा. मेरा अब होने वाला है. जब भी तुम अपने इस पापा का बड़ा लंड लेना चाहो, तो यहाँ आ जाना रात को. आज पूर्णिमा है, तो मैं हर पूर्णिमा तुम्हारा वेट करूँगा.

मे: मुझे पता नही अंकल मैं फिरसे यहाँ आ पौँगी की नही. पर आप अपनी असली बेटी सुरभि को ज़रूर से छोड़ना. और जब उसे छोड़ दो, तब ये रोड पे जो बड़ा सा पेड़ है, उसके उपर एक हार्ट बना कर उसमे स (सुरभि और श्रुति) लिखना, और उसके बीच में आरो बना देना. मैं जब यहाँ से गुज़ृंगी तो उसे देख कर समझ जौंगी की आपने एक स (श्रुति) के साथ दूसरी स (सुरभि) की भी छूट ले ली है.

अंकल: ओक बेटा, पर उसके लिए तुम्हे मेरा लंड मूह में लेकर पानी अंदर निकालना होगा. (अंकल ने मुझे स्वॉलो करने का नही बोला था).

मैं भी फिर खड़े हो कर, अंकल को लिटा कर, कॉंडम निकालते ही उनका लंड अपने मूह में लेकर चूसने लगी. वो फारिघ् होने की कगार पे थे, सो मैने पूरा लंड मूह में निचोढ़ते हुए उनका पानी निकाला, और अपनी आँखें बंद करके पूरा पानी गतक गयी.

ये देख कर अंकल के चेहरे पे फुल खुशी थी, और वहाँ पीछे पापा खड़े हो कर मुझे देख रहे थे, जिनके चेहरे का रंग पूरा उड़ा हुआ था.

मे: मैने ये पिया, ताकि आपको पता चले की ये मज़ा सुरभि भी आपको दे सकती है.

फिर हम लोगों ने अपने कपड़े पहने, और पापा ने अंकल को वो वीडियो डेलीट करने को कहा. तो अंकल ने उनका फोन पापा की और फेंका.

पापा: ये तो स्विच ऑफ है.

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